22 पुनर्वास केंद्रों में से नाै हो गये बेकार
परेशानी .116 गांव होंगे प्रभावित... रांची : चांडिल डैम के डूब क्षेत्रवाले 116 गांवों के विस्थापितों का पुनर्वास कार्य किया जा रहा है. इसके लिए 22 पुनर्वास केंद्र बनाया गया है. इसमें से 13 केंद्र पूरी तरह से विकसित हैं, जबकि नाै केंद्र अविकसित हालत में पड़े हुए हैं. उक्त जानकारी राज्य सरकार ने झारखंड […]
परेशानी .116 गांव होंगे प्रभावित
रांची : चांडिल डैम के डूब क्षेत्रवाले 116 गांवों के विस्थापितों का पुनर्वास कार्य किया जा रहा है. इसके लिए 22 पुनर्वास केंद्र बनाया गया है. इसमें से 13 केंद्र पूरी तरह से विकसित हैं, जबकि नाै केंद्र अविकसित हालत में पड़े हुए हैं. उक्त जानकारी राज्य सरकार ने झारखंड हाइकोर्ट को दी है.
क्या कहा है सरकार ने : जनहित याचिका में कोर्ट द्वारा दिये गये आदेश के आलोक में दायर शपथ पत्र में सरकार ने कहा है कि डैम की जल ग्रहण क्षमता 189 मीटर है. इसकी अधिकतम जल ग्रहण क्षमता 192 है. जब 192 मीटर पानी जमा होगा, तो 116 गांव डूब क्षेत्र में आ जायेंगे. इन गांवों में रहनेवाले हजारों परिवारों के पुनर्वास के लिए सरकार प्रयासरत है. पुनर्वास में समय लगता है. यह टाइम टेकिंग कार्य है. 4490 पुनर्वास प्लॉट है. इसमें से 1993 पुनर्वास प्लॉट खाली पड़े हैं.
कुछ रैयत (विस्थापित) चाहते हैं कि सरकार उन्हें प्रति प्लॉट दो लाख रुपये दे. उन्हें प्लॉट नहीं चाहिए. याचिका दायर करनेवाले भोलानाथ रजक चांडिल डैम के विस्थापित हैं. उन्हें मुआवजा मिल गया है. उनका कहना है कि क्षमता के अनुसार पानी बढ़ गया, तो राज्य सरकार ध्यान नहीं देगी. सभी विस्थापितों का अब तक पुनर्वास नहीं किया गया है. विस्थापितों को नाैकरी देना था, रोजगार देना था, लेकिन सरकार प्लॉट देने के नाम पर भरमा रही है. पुनर्वास के लिए बनाये गये केंद्रों की स्थिति दयनीय है. नये स्थान में विस्थापितों का जीवन-यापन करना काफी कठिन है. सरकार ने पुनर्वास नीति-2012 बनायी है, उसके प्रावधानों के तहत चांडिल डैम के विस्थापितों को भी लाभ दिया जाये.
कुछ रैयत चाहते हैं कि सरकार उन्हें प्रति प्लॉट दो लाख रुपये दे
जब 192 मीटर पानी जमा होगा, तो 116 गांव डूब क्षेत्र में आ जायेंगे
