रांची : झारखंड की रघुवर दास सरकार 13 नवंबर को धनबाद के भेलाटांड़ में विनोद बिहारी महतो विश्वविद्यालय का शिलान्यास करेगी. 25 एकड़ भूूमि पर नये विश्वविद्यालय की स्थापना होगी. यह विश्वविद्यालय हजारीबाग स्थित विनोबा भावे विश्वविद्यालय से अलग कर बनायाजायेगा. विनोद बिहारी महतो मुख्य विपक्ष झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक नेताओं में शामिल थे और पूरे झारखंड में उनकी काफी लोकप्रियता है. कोयलांचल और उत्तरी छोटानागपुर में उनकी विशेष रूप से लोकप्रियता है और वे वहां के गौरवमानेजाते हैं. झारखंड आंदोलन को गति देने में विनोद बिहारी महतो का बड़ा योगदान है.
हालात यह है कि कोयलांचल व उत्तरी छोटानागपुर में राजनीति करने वाले व वहां पैठ बनाने की कोशिश करने वाले हर धड़े को विनोद बिहारी महतो का नाम लेना पड़ता है. उस इलाके में कई ऐसे चौक-नुक्कड़ मिल जाते हैं, जहां विनोद बिहारी महतो की प्रतिमा लगी दिख जाती है.उनकीजयंती एवं पुण्यतिथि परकोयलांचलव उत्तरीछोटानागपुर में बड़ेस्तर पर आयोजन कियाजाता है. ऐसे में उनके नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना कर भाजपा सरकार कोयलांचल के लोगों को उच्च शिक्षा की सहज सुविधा देने के साथ वहां एक पॉलिटिकल माइलेज भी लेना चाहती है.
कुछ हद तक इस स्थिति की तुलना सरदार पटेल केनामपर राष्ट्रीय स्तर पर केंद्र सरकार द्वारा किये जाने वाले काम से कर सकते हैं. केंद्र सरकार सरदार पटेलकीसबसे बड़ी प्रतिमा का निर्माण करा रही है और खुले तौर पर यह कहती है कि इतिहास में उनकी उपेक्षा की गयी है और उनके नाम को मिटाने का प्रयास किया गया. हालांकि, झारखंड में यह इस मायने में अलग है कि यहां सरदार पटेल बनाम नेहरू परिवार जैसे मुद्दे पर छिड़ी तीखी बहस की स्थितिस्वर्गीय विनोद बिहारी महतो के नाम पर नहीं बनी हैऔर कड़वाहट नहीं दिख रही है. हां, हर धड़ा उन्हें अपना आदर्श पुरुष के रूप में जरूर पेश करता है.
विनोद बिहारी महतो के नाम पर अब एक बड़े संस्थान की स्थापना झारखंडमेंमुख्यमंत्रीरघुवर दास के नेतृत्ववाली भाजपा सरकार की बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी. आजसू भी धनबाद में उनकी 150 फीट की प्रतिमा स्थापित करने में जुटा है. विनोद बिहारी महतो के पुत्र राजकिशाेर महतो टुंडी विधानसभा क्षेत्र आजसू से ही विधायक हैं.
