रजरप्पा डकैती कांड में पुलिस को बड़ी कामयाबी, जमीन में छिपाए गए जेवरात बरामद

Ramgarh News: रामगढ़ के रजरप्पा ज्वैलर्स डकैती कांड में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. जमीन में छिपाकर रखे गए सोना-चांदी के 134 पीस जेवरात बरामद किए गए हैं. मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अन्य फरार अपराधियों की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

रामगढ़ से संजय शुक्ला की रिपोर्ट

Ramgarh News: झारखंड के रामगढ़ जिले में चर्चित रजरप्पा ज्वैलर्स डकैती कांड में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है. रजरप्पा थाना क्षेत्र के चितरपुर स्थित रजरप्पा मोड़ पर शिव शंकर ज्वैलर्स में हुई डकैती मामले में पुलिस ने जमीन में छिपाकर रखे गए भारी मात्रा में सोना और चांदी जैसे जेवरात बरामद किए हैं. पुलिस की इस कार्रवाई को मामले की जांच में अहम उपलब्धि माना जा रहा है. बरामद जेवरात को अपराधियों ने बेहद शातिर तरीके से घर के अंदर जमीन के नीचे गाड़कर रखा था, ताकि किसी को इसकी भनक न लग सके.

21 अप्रैल को हुई थी ज्वैलरी दुकान में डकैती

जानकारी के अनुसार, 21 अप्रैल 2026 को शिव शंकर ज्वैलर्स में हथियारबंद अपराधियों ने डकैती की बड़ी वारदात को अंजाम दिया था. घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई थी. दुकान संचालक विष्णु प्रसाद के बयान पर रजरप्पा थाना में कांड संख्या 48/2026 दर्ज किया गया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए रामगढ़ पुलिस तुरंत हरकत में आई और अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष रणनीति बनाई गई.

एसपी के निर्देश पर गठित हुई एसआईटी

रामगढ़ के पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार लुणायत के निर्देश पर इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया गया. इस टीम का नेतृत्व पुलिस उपाधीक्षक चंदन वत्स को सौंपा गया. एसआईटी ने तकनीकी और मानवीय सूचना के आधार पर लगातार छापेमारी अभियान चलाया. पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए 24 अप्रैल को इस मामले में शामिल सात अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. इसके बाद भी पुलिस लगातार लूटे गए जेवरात और अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी रही.

गुप्त सूचना के आधार पर हुई बड़ी छापेमारी

पुलिस को 10 मई को गुप्त सूचना मिली कि डकैती में लूटे गए जेवरात मुख्य आरोपी सुभानी अंसारी उर्फ ललका के परिजनों के घर में छिपाकर रखे गए हैं. सूचना मिलते ही एसआईटी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित ठिकाने पर छापेमारी की. इस दौरान आरोपी की पत्नी नाजमा खातुन और उसके दामाद शहनवाज हुसैन से पूछताछ की गई. पूछताछ में दोनों ने जमीन के नीचे छिपाकर रखे गए जेवरात के बारे में जानकारी दी.

जमीन में गाड़कर रखे गए थे सोना-चांदी के जेवर

पुलिस ने निशानदेही के आधार पर घर के अंदर खुदाई कराई. खुदाई के दौरान जमीन के नीचे छिपाकर रखे गए कई जेवरात बरामद हुए. पुलिस ने मौके से सोना और चांदी जैसे धातु के कुल 134 पीस जेवरात जब्त किए हैं. बरामद सामान में हार, झुमका, अंगूठी, कंगन, चूड़ियां और अन्य आभूषण शामिल हैं. पुलिस के अनुसार, बरामद चांदी का वजन लगभग 1350 ग्राम है, जबकि सोना जैसे धातु का वजन करीब 49 ग्राम बताया गया है.

दो आरोपी गिरफ्तार, अन्य अपराधियों की तलाश जारी

इस मामले में पुलिस ने नाजमा खातुन और शहनवाज हुसैन को गिरफ्तार कर लिया है. दोनों पर डकैती के बाद लूटे गए सामान को छिपाने और अपराधियों की मदद करने का आरोप है. पुलिस का कहना है कि मामले में अभी कुछ अन्य आरोपी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है. साथ ही लूटे गए बाकी सामान की बरामदगी के लिए भी जांच जारी है.

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छापेमारी टीम में शामिल रहे कई अधिकारी

इस पूरी कार्रवाई में पुलिस निरीक्षक रजत कुमार, थाना प्रभारी आशुतोष कुमार सिंह, पुलिस अवर निरीक्षक रोहित राज सिंह, आशीष कुमार गौतम और नागेंद्र सिंह आजाद की अहम भूमिका रही. इसके अलावा रजरप्पा थाना और कुज्जू ओपी के सशस्त्र बल के जवान भी छापेमारी अभियान में शामिल रहे. पुलिस अधिकारियों ने कहा कि संगठित अपराध और डकैती की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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