नेमरा में बाहा पूजा को लेकर उत्साह चरम पर, सीएम हेमंत सोरेन पहुंचे पैतृक गांव

Hemant Soren Nemra: रामगढ़ के नेमरा गांव में बाहा पूजा को लेकर उत्साह चरम पर है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पैतृक गांव पहुंचकर अनुष्ठान में शामिल होंगे. जेहर थान में पूजा की तैयारी पूरी है. ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में जुटे हैं. प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं. पूरी खबर नीचे पढ़ें.

गोला से राज कुमार की रिपोर्ट

Hemant Soren Nemra: झारखंड के रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड अंतर्गत नेमरा गांव इन दिनों पारंपरिक बाहा पूजा को लेकर उत्साह और आस्था के रंग में रंगा हुआ है. गांव की गलियों से लेकर सरना स्थल तक विशेष तैयारियां की गई हैं. घर-घर में साफ-सफाई, पारंपरिक सजावट और पूजा सामग्री की व्यवस्था की गई है. पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल नजर आ रहा है.

हेमंत सोरेन पहुंचे पैतृक गांव

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बुधवार शाम करीब छह बजे सड़क मार्ग से अपने पैतृक गांव नेमरा पहुंचे. उनके आगमन पर ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिला. पंचायत के मुखिया जीतलाल टुडू सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने बुके भेंट कर उनका आत्मीय स्वागत किया. जिला प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए. मुख्यमंत्री का हर वर्ष बाहा पूजा में शामिल होना गांव के लोगों के लिए गर्व और परंपरा दोनों का प्रतीक बन चुका है. ग्रामीणों का कहना है कि इससे न केवल धार्मिक आस्था मजबूत होती है, बल्कि सांस्कृतिक पहचान भी सशक्त होती है.

बाहा पूजा की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता

बाहा पूजा संथाल समाज की अत्यंत महत्वपूर्ण परंपरा मानी जाती है. गांव के उप पहान छोटू बेसरा के अनुसार यह पूजा गांव की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना के साथ प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है. श्रद्धालु जेहर थान यानी सरना स्थल पर पहुंचकर ग्राम देवताओं से मन्नत मांगते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद यहां पूरी होती है. मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु बकरा, मुर्गी आदि की बलि चढ़ाकर पूजा-अर्चना करते हैं. यह अनुष्ठान प्रकृति पूजा, ग्राम देवताओं के प्रति आस्था और सामुदायिक एकता का प्रतीक माना जाता है.

दिशोम गुरु की परंपरा को आगे बढ़ा रहे मुख्यमंत्री

ग्रामीणों के अनुसार पूर्व में दिशोम गुरु के नाम से प्रसिद्ध शिबू सोरेन नियमित रूप से इस पूजा में शामिल होते थे. उनके निधन के बाद अब इस परंपरा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन निभा रहे हैं. गांव के बुजुर्गों का कहना है कि मुख्यमंत्री का हर वर्ष बाहा पूजा में शामिल होना केवल पारिवारिक परंपरा का निर्वहन नहीं है, बल्कि संथाल संस्कृति और आदिवासी परंपराओं के संरक्षण का भी मजबूत संदेश देता है. इससे नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा मिलती है.

प्रशासन अलर्ट, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है. रामगढ़ उपायुक्त फैज अक अहमद मुमताज, एसपी अजय कुमार, एसडीपीओ गौरव गोस्वामी और बरलंगा थाना प्रभारी अशोक कुमार सहित कई प्रशासनिक पदाधिकारी मौके पर मौजूद हैं. सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है. अधिकारियों ने बताया कि पूजा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो, इसके लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं.

इसे भी पढ़ें: जमशेदपुर में होली पर 100 रुपये किलो बिका कटहल, तो मटन किस भाव?

पारंपरिक नृत्य-गीत से गूंजेगा नेमरा

बाहा पूजा को लेकर गांव के युवाओं और महिलाओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है. पारंपरिक वेशभूषा में ग्रामीण नजर आ रहे हैं. पारंपरिक नृत्य, गीत और सामूहिक अनुष्ठान की तैयारियां अंतिम चरण में हैं. नेमरा गांव एक बार फिर अपनी सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक एकजुटता का परिचय देने को तैयार है. मुख्यमंत्री की मौजूदगी से इस वर्ष का बाहा पूजा आयोजन और भी विशेष एवं ऐतिहासिक बनने जा रहा है. गांव के लोगों को उम्मीद है कि यह आयोजन संथाल संस्कृति की समृद्ध परंपरा को नई पहचान देगा.

इसे भी पढ़ें: सरायकेला के नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज चौधरी ने वृद्धाश्रम में मनाई होली, बुजुर्गों को खिलाईं मिठाई

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >