आसमान में मंडरा रहे बादल मगर सूखा है खेत, बिचड़ा बोने के बाद चिंतित हैं किसान

Ramgarh News: रामगढ़ में हल्की बारिश के बाद किसानों ने धान का बिचड़ा तो डाल दिया, लेकिन पर्याप्त वर्षा नहीं होने से अंकुरण नहीं हो रहा है. खेत सूखे पड़े हैं और किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं. जल्द बारिश नहीं हुई तो धान की खेती और उत्पादन पर असर पड़ सकता है.

Ramgarh News: मानसून की शुरुआत के बावजूद झारखंड के रामगढ़ जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में खेती की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. हल्की बारिश के बाद किसानों ने धान का बिचड़ा (बिहन) तो डाल दिया, लेकिन पर्याप्त पानी नहीं मिलने से अब तक अंकुरण नहीं हो पाया है.

खेत में बोने के बाद अंकुर नहीं रहा है बीज


बिन पानी के सूखा खेत.

किसानों का कहना है कि कुछ दिन पहले हुई हल्की बारिश के बाद खेत तैयार कर बीज डाले गए थे, लेकिन उसके बाद बारिश नहीं हुई. मिट्टी में नमी नहीं रहने के कारण बीज जमीन में ही पड़ा है और अंकुरित नहीं हो पा रहा है.

किसानों की बढ़ी चिंता, बारिश का इंतजार


जुताई के बाद सूखा पड़ा खेत.

ग्रामीण इलाकों में किसान लगातार आसमान की ओर देख रहे हैं. खेत तैयार है, लेकिन पानी के अभाव में खेती आगे नहीं बढ़ पा रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है.

किसान का बयान


एक किसान ने बताया, “पानी अगर नहीं आएगा तो खेती कैसे होगी. बीज डाल दिए हैं, बीच में थोड़ी बारिश हुई थी, लेकिन उसके बाद पानी नहीं आया. अब अंकुरित होने में परेशानी हो रही है. हम लोग बारिश का इंतजार कर रहे हैं.”

महिला किसान का बयान


वहीं एक महिला किसान ने बताया, “खेत देखने जा रहे हैं. बीज डाले हैं लेकिन अभी तक कुछ नहीं उगा है. पानी नहीं है, इसी को लेकर चिंता है और बारिश का इंतजार है.”

मशीन से सिंचाई कर लगा रहे बिचड़ा


कुछ किसान मशीन के जरिए पानी पटाकर धान का बिचड़ा लगाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह सभी के लिए संभव नहीं है. ऐसे में अधिकतर किसान प्राकृतिक बारिश पर ही निर्भर हैं.

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जल्द बारिश नहीं हुई तो खेती पर पड़ेगा असर


किसानों का कहना है कि अगर जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई, तो धान की खेती पर इसका सीधा असर पड़ेगा और उत्पादन प्रभावित हो सकता है. फिलहाल सभी की नजर आसमान पर टिकी है.

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लेखक के बारे में

Published by: Kumarvishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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