भदानीनगर : भुरकुंडा पूरन राम चौक के समीप नागेश्वर मैदान में अंगरेजों के जमाने से दुर्गा पूजा हो रही है. पूजा की शुरुआत पूरन राम (अब स्वर्गीय) ने 1930-40 के दशक में की थी. उस वक्त पूजा मंडप की जगह खपरैल मड़ई में प्रतिमा स्थापित की जाती थी. पूजा पर बकरे की बलि का भी प्रचलन था. कहा जाता है कि पूजा आयोजक पूरन राम को सपने में बलि की मनाही का आदेश मिलने के बाद वैष्णव रीति-रिवाज से पूजा शुरू की गयी.
पूरन राम के निधन के बाद उनके पुत्र रामेश्वर करमाली (अब स्वर्गीय) द्वारा पूजा के आयोजन का बीड़ा उठाया गया. इसमें उनके भाई कांशीनाथ करमाली व नागेश्वर करमाली सहयोग करते थे. रामेश्वर करमाली के निधन के बाद उनके भाई के पुत्र सुरेंद्र राम व अब स्व रामेश्वर करमाली के पुत्र संतोष राम पूजा आयोजन का बीड़ा उठा रहे हैं. स्व पूरन राम की पुत्र वधू रतन देवी (85) व पानमति देवी (78) ने बताया कि उस जमाने में क्षेत्र में और कहीं भी दुर्गा पूजा का आयोजन नहीं होता था.
छोटे स्तर से करमाली टोला में रोहनिया भगत द्वारा पूजा की जाती थी. बताया कि शुरुआती समय से ही नागेश्वर मैदान में आयोजित दुर्गा पूजा में प्रतिमा निर्माण के लिए बंगाल के कारीगर बुलाये जाते हैं. इस परंपरा को जारी रखते हुए यहां भव्य रूप से पूजा का आयोजन किया जाता है. क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में पहुंच कर माता का दर्शन करते हैं.
