पीएम जन-मन योजना से झारखंड के पहाड़िया गांवों को जोड़ेगी 40 सड़कें, बनेंगे 18 पुल

PM-JANMAN Scheme: पीएम जन-मन योजना के तहत झारखंड के पहाड़िया गांवों में 139 सड़कों और 18 पुलों का निर्माण होगा. साहिबगंज जिले में सबसे ज्यादा विकास कार्य होंगे. इस परियोजना से ग्रामीणों को बेहतर संपर्क सुविधा मिलेगी और बरसात के समय आवागमन की समस्या से राहत मिलेगी. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

PM-JANMAN Scheme: झारखंड में पहाड़िया जनजाति बहुल इलाकों के विकास को नई गति देने के लिए हेमंत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. प्रधानमंत्री जन-मन योजना के तहत दूरदराज के पहाड़िया गांवों को सड़क और पुलों से जोड़ने की दिशा में काम तेज किया जा रहा है. इस पहल से उन इलाकों में रहने वाले लोगों को राहत मिलेगी, जो अब तक बुनियादी संपर्क सुविधाओं से वंचित रहे हैं.

12 जिलों में 139 सड़कों का निर्माण

दूसरे चरण में राज्य के 12 जिलों में कुल 291 किलोमीटर लंबी 139 सड़कों के निर्माण को मंजूरी दी गई है. इस परियोजना पर लगभग 2,59,1288 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे. इन जिलों में पाकुड़, पलामू, गढ़वा, चतरा, दुमका, गोड्डा, गुमला, जामताड़ा, लातेहार, पूर्वी सिंहभूम और कोडरमा शामिल हैं. इससे हजारों ग्रामीणों को सीधा लाभ मिलेगा.

साहिबगंज जिला सबसे आगे

इस योजना में साहिबगंज जिला सबसे आगे है. यहां 88 किलोमीटर लंबी 40 सड़कों का निर्माण 72 करोड़ 89 लाख रुपये की लागत से किया जाएगा. अलग-अलग प्रखंडों में सड़कों का विस्तार किया जाएगा, जिसमें तालझारी प्रखंड में सबसे ज्यादा 21 सड़कें बनेंगी. इसके अलावा बोरियो, बरहेट, मंडरो और पतना प्रखंड भी शामिल हैं.

18 पुलों का निर्माण भी होगा

सड़क निर्माण के साथ-साथ पुल निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. साहिबगंज जिले में कुल 594 मीटर लंबाई के 18 पुल बनाए जाएंगे, जिन पर 34 करोड़ 5 लाख रुपये खर्च होंगे. बोरियो प्रखंड में 8, बरहेट में 3, मंडरो में 6 और पतना प्रखंड में 1 पुल का निर्माण प्रस्तावित है. इससे आवागमन की बड़ी बाधा दूर होगी.

ग्रामीणों को मिलेगी बड़ी राहत

इन सड़कों और पुलों के निर्माण से पहाड़िया जनजाति के लोगों को कीचड़ भरे रास्तों से छुटकारा मिलेगा. ग्रामीण अक्सर बांस, मकई, कटहल, बरबट्टी और जलावन की लकड़ी लेकर बाजार जाते हैं. बरसात के समय रास्ते खराब होने के कारण उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. नई सड़कें बनने से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी आसान होगी.

केंद्र और झारखंड सरकार का साझा प्रयास

इस योजना की खास बात यह है कि इसमें 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा दी जा रही है. इससे विकास कार्यों को वित्तीय मजबूती मिल रही है. सरकार का उद्देश्य है कि दूरस्थ इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ा जाए और वहां के लोगों को बेहतर जीवन सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं.

क्या कहते हैं साहिबगंज के उपायुक्त

साहिबगंज जिले के उपायुक्त हेमंत सती ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद पहाड़िया गांव मुख्य सड़कों से जुड़ जाएंगे. खासकर बरसात के दिनों में लोगों को बड़ी राहत मिलेगी. वहीं कार्यपालक अभियंता देवीलाल हांसदा ने बताया कि 40 सड़कों और 18 पुलों के लिए जल्द ही ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

इसे भी पढ़ें: 31 मार्च के बाद खत्म हो रहे झारखंड से चलने वाली कई स्पेशल ट्रेनों के फेरे, विस्तार का इंतजार

जल्द शुरू होगा निर्माण कार्य

अधिकारियों के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद दो माह के भीतर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा. सरकार की इस पहल से झारखंड के सुदूर क्षेत्रों में विकास की नई तस्वीर देखने को मिलेगी. यह योजना न केवल संपर्क सुविधाओं को बेहतर बनाएगी, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगी.

इसे भी पढ़ें: गर्मी में खूब भरें रांची से हिल स्टेशनों की उड़ान, बिरसा मुंडा एयरपोर्ट ने जारी किया विमानों का शेड्यूल

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >