प्रतिनिधि, मोहम्मदगंज आवारा कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि सड़क पर चलने वाले राहगीर, वाहन चालक और ट्रेन से उतरने वाले रेलयात्री चौबीसों घंटे दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं. सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों के बाद भी स्थानीय प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गयी है. मोहम्मदगंज का स्टेशन रोड और नहर किनारे खुले में चल रही मांस की दुकानों के पास रात के समय 10 से 15 कुत्तों का हिंसक झुंड बीच सड़क पर डेरा डाले रहता है. हालत यह है कि स्टेशन रोड से गुजरने वाले पैदल यात्री सुरक्षा के लिए लाठी-डंडे लेकर चलने को मजबूर हैं, फिर भी ये कुत्ते डरे बिना सीधे हमला करने के मूड में रहते हैं. बाइक सवारों का ये काफी दूर तक पीछा करते हैं, जिससे बचने के लिए चालक पैरों को ऊपर मोड़कर गाड़ी भगाते हैं. कई ग्रामीणों के शरीर से मांस नोचने की जानलेवा घटनायें भी हो चुकी हैं. पड़ताल में सामने आया है कि यात्रियों के पीछे आये ग्रामीण क्षेत्रों के पालतू कुत्ते यहीं छूटकर लावारिस हो जाते हैं, जो होटलों की जूठन और मांस की दुकानों के कच्चे अपशिष्ट को खाकर हिंसक और पागलपन के शिकार हो रहे हैं. बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था: रैबीज के टीके के लिए 20 किमी दूर जाने की मजबूरी कुत्तों के बढ़ते हमलों के बीच मोहम्मदगंज प्रखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से बदहाल है. स्थानीय सरकारी अस्पतालों में रैबीज का जीवनरक्षक टीका तक उपलब्ध नहीं है. कुत्ता काटने पर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद 20 किलोमीटर दूर हुसैनाबाद अनुमंडलीय अस्पताल भागना पड़ता है. ग्रामीणों के अनुसार, वहां भी अक्सर टीका न होने के कारण उन्हें खुले बाजार से महंगे दामों पर रैबीज इंजेक्शन खरीदना पड़ता है. वर्तमान में मोहम्मदगंज का स्वास्थ्य उपकेंद्र और नवनिर्मित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महज एक नर्स और सीएचओ के भरोसे रामभरोसे चल रहा है, जहां केवल सामान्य प्रसव और प्राथमिक उपचार ही मुमकिन है.स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इस बढ़ते आतंक से मुक्ति दिलाने और लावारिस कुत्तों को जल्द से जल्द पकड़वाने की पुरजोर मांग की है, ताकि किसी की जान सुरक्षित रह सके
आवारा कुत्तों के आतंक से मोहम्मदगंज के राहगीर और रेलयात्री परेशान
आवारा कुत्तों के आतंक से मोहम्मदगंज के राहगीर और रेलयात्री परेशान
