विभागीय पदाधिकारी की उपेक्षा का दंश झेल रहा है बगैया मध्य विद्यालय

वर्ग छह से आठ के लिए एक भी शिक्षक नहीं, 83 बच्चों का भविष्य अंधकारमय

वर्ग छह से आठ के लिए एक भी शिक्षक नहीं, 83 बच्चों का भविष्य अंधकारमय रामनरेश तिवारी, पाटन पलामू जिले के पाटन प्रखंड के बगैया मध्य विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं का दंश झेल रहा है. विद्यालय में 220 बच्चे नामांकित है. वर्ग एक से पांच तक 147 व वर्ग छह से आठ में 83 विद्यार्थी हैं. प्रतिदिन लगभग 160 से 170 बच्चे उपस्थित होते हैं. सिर्फ दो शिक्षक वर्ग एक से पांच के लिए पदस्थापित हैं. जबकि शिक्षा के अधिकार के तहत 30 बच्चों पर एक शिक्षक का होना अनिवार्य बताया गया है. इधर वर्ग छह से आठ के लिए तीन शिक्षकों का होना अनिवार्य है. क्योंकि वर्ग छह से आठ में नामांकित बच्चों की संख्या कुल 83 हैं. इस तरह बगैया मवि आठ शिक्षक होना चाहिए था. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि वर्ग छह से आठ में एक भी शिक्षक पदस्थापित नहीं हैं. जबकि बगैया बोनाफाइड स्कूल है. इसकी स्थापना अंग्रेजी हुकूमत के जमाने में वर्ष 1931 में हुई थी. प्रखंड मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर उतर पूरब की दिशा में स्थित है. 10 वर्ष पूर्व विद्यालय में शिक्षकों का स्वीकृत पद पांच था. जिसे घटाकर दो पद कर दिया गया. लेकिन वर्ग एक से पांच व छह से वर्ग आठ दोनों को अलग अलग कर दिया गया. वर्ग से पांच तक में विषयवार शिक्षकों की पदस्थापना नहीं होती है. जबकि वर्ग छह से आठ तक के लिए विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति होती है. जिसमें भाषा, विज्ञान व कला विषय के लिए एक-एक शिक्षकों की नियुक्ति किया जाना है. लेकिन दुर्भाग्य की बात तो यह कि विद्यालय में भाषा विषय की एक शिक्षिका थी, उनका भी तबादला जिला मुख्यालय में कर दिया गया और उनके स्थान पर किसी अन्य शिक्षकों की पदस्थापन नहीं किया गया. प्रधानाध्यापक जितेंद्र कुमार ने बताया कि विद्यालय में 220 नामांकित बच्चे हैं. जबकि मात्र दो शिक्षक पदस्थापित हैं. जिससे शैक्षणिक कार्यों में परेशानी होती है. विद्यालय में शिक्षकों की कमी है. इसे लेकर कई बार पत्राचार किया गया है. लेकिन एक भी शिक्षक की पदस्थापना नहीं हुई है. उन्होंने बताया कि विद्यालय का चहारदीवारी नहीं होने के कारण जहां एक ओर विद्यालय भूमि का अतिक्रमण कर लिया जा रहा है. जबकि दूसरी ओर असामाजिक तत्वों द्वारा परिसर में गंदगी फैला दिया जाता है. शराब पीकर परिसर में ही इधर उधर बोतल फोड़ कर फेंक दिया जाता है. जिससे बच्चों को कटने का खतरा बढ़ जाती है. उन्होंने बताया कि विद्यालय के कमरे में ताला बंद किया जाता है. जिसमें कभी अलकतरा तो कभी बेल का लासा भर दिया जाता है, जिससे उन्हें काफी परेशानी होती है. नया ताला लेकर लगाते हैं. लेकिन असामाजिक तत्वों द्वारा उसमें भी कुछ न भर कर खराब कर दिया जाता है. उन्होंने कहा कि चहारदीवारी होता, तो असामाजिक तत्वों के लोग विद्यालय के अंदर प्रवेश नहीं कर पाते. जिससे विद्यालय सुरक्षित रहता. उन्होंने बताया कि सुदूरवर्ती इलाका है. विद्यालय को हाई स्कूल में अपग्रेड करने को लेकर पत्राचार किया गया है. क्योंकि यह विद्यालय कसवाखांड़ पंचायत में आता है. ऐसे भी कसवाखांड़ पंचायत अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित है.

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By Akarsh aniket

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