बिना लाइसेंस होटल-मैरेज हॉल चलाना गैरकानूनी, 15 प्रतिष्ठान डिफॉल्टर

बिना लाइसेंस होटल-मैरेज हॉल चलाना गैरकानूनी, 15 प्रतिष्ठान डिफॉल्टर

प्रतिनिधि, मेदिनीनगर शहरी क्षेत्र में संचालित होटल, रेस्टोरेंट, मैरेज हॉल, लॉज, छात्रावास और धर्मशालाओं के लाइसेंस की अवधि 31 मार्च को समाप्त हो गयी है. चालू वित्तीय वर्ष में इनके संचालन के लिए नगर निकाय से नवीनीकरण कराना अनिवार्य है. मेदिनीनगर नगर निगम क्षेत्र में कुल 77 ऐसे प्रतिष्ठान संचालित हैं. झारखंड नगरपालिका अधिनियम के तहत बिना वैध लाइसेंस के इनका संचालन करना गैरकानूनी है. सहायक नगर आयुक्त प्रमोद उरांव ने बताया कि अधिनियम के अनुसार लाइसेंस एक साल के लिए निर्गत किया जाता है. वर्तमान में नवीनीकरण की प्रक्रिया जारी है और अब तक 62 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनकी जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जायेगी. शहर के 15 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों ने अब तक आवेदन जमा नहीं किया है.इनमें अर्चना होटल, सत्कार भवन, निर्वाणा होटल, त्रिपाठी इंटरनेशनल होटल, शिवम होटल, आरडीएस, अग्रसेन भवन, देवी होटल, ललिता श्री, होटल पूजा, होटल सूर्यांश, नामधारी होटल, स्टगन मैरेज हॉल और चैनपुर स्थित होटल इकवारा शामिल हैं.निगम प्रशासन शुल्क जमा होने के बाद ही लाइसेंस निर्गत करेगा. पिछले वर्ष नवीनीकरण न कराने वाले प्रतिष्ठानों से जुर्माना भी वसूला जायेगा.

लाइसेंस के लिए निर्धारित वार्षिक शुल्क

पांच हजार वर्गफीट तक की धर्मशाला के लिए एक हजार और उससे अधिक क्षेत्र के लिए 1500 रुपये शुल्क है.

पांच हजार वर्गफीट तक के विवाह भवन व बैंक्वेट हॉल के लिए 10 हजार और उससे अधिक के लिए 15 हजार रुपये निर्धारित हैं.

लॉज के लिए 10 बेड तक एक हजार, 20 बेड तक 1500, 50 बेड तक दो हजार और उससे अधिक के लिए 2500 रुपये शुल्क लगेगा.

छात्रावास के लिए 10 बेड तक 800, 20 बेड तक एक हजार, 50 बेड तक 1500 और उससे अधिक के लिए दो हजार रुपये देय है.

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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