रामनरेश तिवारी की रिपोर्ट
Palamu: पलामू के पाटन किशुनपुर सांसद आदर्श ग्राम पंचायत में ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाया गया लाखों रुपये का आरओ प्लांट पिछले पांच-छह वर्षों से बंद पड़ा हुआ है. सरकारी उदासीनता और अनदेखी के कारण 28 लाख रुपये की कीमती मशीनें कबाड़ में तब्दील हो रही हैं और धूल फांक रही हैं. पलामू के सांसद विष्णु दयाल राम ने वर्ष 2014 में पहली बार चुने जाने के बाद किशुनपुर को सांसद आदर्श ग्राम के रूप में गोद लिया था. ग्रामीणों को बेहतर नागरिक सुविधाएं देने के वादे के तहत सांसद निधि के भारी-भरकम राशि से इस आरओ प्लांट का निर्माण कराया गया. 12 फरवरी 2016 को इसका उद्घाटन हुआ था. इसके बाद ग्रामीणों में शुद्ध पेयजल मिलने की उम्मीद जगी थी.
पंजाब से बुलाये गये थे मैकेनिक, लगा था ट्रांसफार्मर
शुरुआत में प्लांट को चलाने में लो-वोल्टेज और तकनीकी खराबी जैसी बड़ी समस्याएं थी. उस वक्त सांसद की पहल पर पंजाब से विशेष मैकेनिक बुलाकर तकनीकी गड़बड़ी दूर करायी गयी थी. मशीन को चलाने के लिए थ्री-फेज बिजली के लिए नया ट्रांसफार्मर भी लगवाया गया. तमाम प्रयासों के बाद यह प्लांट लगभग पांच वर्षों तक सुचारू रूप से चला भी, लेकिन उसके बाद व्यवस्था ठप हो गयी.
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प्लांट के बंद होने की मुख्य वजह इसका संचालन करने वाले स्थानीय कर्मी धर्मेंद्र पासवान की घोर उपेक्षा है. दैनिक मजदूरी पर रखे गये धर्मेंद्र ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उन्हें काम के बदले अब तक मात्र 81 हजार रुपये ही मिले हैं. बाद में उनकी मजदूरी घटाकर महज 3500 रुपये महीना तय किया गया. लेकिन वह राशि भी उन्हें नसीब नहीं हुई. धर्मेंद्र का कहना है कि बिना पैसों के काम करना नामुमकिन है. मेरे भी बाल-बच्चे हैं, उनका पेट पालना मेरी जिम्मेदारी है.
प्रशासनिक संवेदनशीलता पर उठ रहे सवाल
एक तरफ सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर नल का जल पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ बना-बनाया ढांचा सरकारी विभागों और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही के कारण बंद पड़ा है. 28 लाख रुपये की यह योजना आज सिर्फ कागजों और यादों में सिमट कर रह गयी है. लोगों का कहना है कि जिस पंचायत को पलामू सांसद ने खुद गोद लेकर आदर्श बनाने का संकल्प लिया था, वहां की जनता आज बुनियादी पेयजल संकट से जूझ रही है. ग्रामीण आज भी शुद्ध पानी के लिए तरस रहे हैं.
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