शौचालयों में दरवाजे नहीं, दवाएं बाहर से खरीदने को मजबूर सुधार के दावे बेअसर
रामनरेश तिवारी, मेदिनीनगर
पलामू प्रमंडलीय मुख्यालय स्थित मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एमएमसीएच) की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरायी नजर आ रही है. मरीजों के इलाज के बजाय खुद अस्पताल को ही सुधार की जरूरत महसूस हो रही है. स्थिति यह है कि अस्पताल के पदाधिकारी और चिकित्सकों पर न तो जनप्रतिनिधियों का दबाव दिख रहा है और न ही वरीय अधिकारियों का असर. मंत्री और विभागीय सचिव द्वारा निरीक्षण के बाद भी व्यवस्था में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है. मरीजों का कहना है कि यहां इलाज भगवान भरोसे चल रहा है. अस्पताल के कई शौचालयों की हालत अत्यंत खराब है. कई शौचालयों में दरवाजे तक नहीं हैं, जबकि पैन में गंदगी भरी हुई है. भर्ती मरीजों ने बताया कि उन्हें सुबह तड़के ही शौचालय जाना पड़ता है, क्योंकि उजाला होने के बाद दरवाजे के अभाव में काफी असहज स्थिति बन जाती है. मरीजों का आरोप है कि अस्पताल में 85 प्रतिशत से अधिक दवाएं उपलब्ध नहीं रहतीं, जिसके कारण उन्हें बाहर की दुकानों से महंगी कीमत पर दवा खरीदनी पड़ती है. शिकायत करने पर अस्पताल कर्मियों और चिकित्सकों के व्यवहार का भी डर बना रहता है. अस्पताल में लगे पंखे भी ज्यादातर खराब पड़े हैं, जिससे मरीजों को गर्मी और मच्छरों से जूझना पड़ रहा है. मरीजों को डर है कि मच्छरों के कारण उनकी बीमारी और न बढ़ जाए. कांदु मोहल्ला निवासी बद्री प्रसाद, जो पिछले 15 दिनों से फ्रैक्चर के इलाज के लिए भर्ती हैं ने बताया कि डॉक्टर केवल देखकर चले जाते हैं. उनके पैर में जख्म हो गया है और ऑपरेशन बाद में होगा. उन्होंने कहा कि डॉक्टर द्वारा लिखी गयी दवाएं अस्पताल में उपलब्ध नहीं होतीं. वहीं लेस्लीगंज निवासी विकास यादव ने भी अस्पताल की व्यवस्था को लचर बताते हुए कहा कि कुछ दवाएं ही अस्पताल से मिलती हैं, बाकी बाहर से खरीदनी पड़ती हैं. इस संबंध में अस्पताल मैनेजर सुमित श्रीवास्तव ने बताया कि कुछ शौचालय अनुपयोगी हो चुके हैं, जिन्हें तोड़कर नया निर्माण कराया जायेगा. उन्होंने कहा कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा दरवाजे तोड़ दिये गये हैं. दवा खरीद के संबंध में उन्होंने बताया कि यह अस्पताल अधीक्षक का कार्य है.
