पांच साल से नहीं कर रहे दलहन तेलहन और सब्जियों की खेती

हैदरनगर/पलामू : हुसैनाबाद अनुमंडल क्षेत्र के कोयल व सोन नदी के तटवर्ती किसान नीलगायों के उत्पात से इतना परेशान है कि विगत पांच वर्षों से दलहन, तेलहन व सब्जियों की फसल लगाना ही छोड़ दिया है. इसका सीधा असर स्थानीय बाजार पर पड़ रहा है. साथ ही किसानों की आर्थिक स्थिति चरमरा गयी है. किसानों […]

हैदरनगर/पलामू : हुसैनाबाद अनुमंडल क्षेत्र के कोयल व सोन नदी के तटवर्ती किसान नीलगायों के उत्पात से इतना परेशान है कि विगत पांच वर्षों से दलहन, तेलहन व सब्जियों की फसल लगाना ही छोड़ दिया है. इसका सीधा असर स्थानीय बाजार पर पड़ रहा है. साथ ही किसानों की आर्थिक स्थिति चरमरा गयी है.

किसानों ने इस समस्या को लेकर वन विभाग व प्रशासनिक अधिकारियों को लगातार अवगत कराया है. मगर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. कई बार यह मामला प्रखंड विकास समिति की बैठक में सदस्यों ने उठाया है. बैठक में वन विभाग के अधिकारियों का एक ही जवाब मिलता है कि किसानों की फसल नीलगायों से बर्बाद होती है, तो उन्हें मुआवजा दिया जाता है.

2500 हेक्टेयर जमीन प्रभावित: सोन व कोयल नदियों के तटवर्ती क्षेत्र के अलावा सटे हुए अन्य इलाकों में भी नीलगायों का उत्पात रहता है. इससे करीब 2500 हेक्टेयर भूमि में दलहन, तेलहन व सब्जियों की खेती किसान नहीं कर पा रहे है. किसानों के अनुसार अभी अरहर का सीजन है. प्रभावित किसानों ने अरहर की खेती नहीं की. उन्होंने बताया कि दलहन, तेलहन व सब्जियों की खेती को मिनटों में नीलगाय चट जाते है, जिससे किसानों की मेहनत व पैसा बर्बाद होता है.

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