मेदिनीनगर : दर्द थमने का नाम नहीं ले रहा है, मर्ज दिन ब दिन पुराना होता जा रहा है. मर्ज ऐसा मानो लाइलाज हो गया. दूर करने के लिए प्रयास तो खूब हुए पर नतीजा शून्य निकला. ठीक उसी तरह जैसे मर्ज बढ़ता ही गया, ज्यों-ज्यों दवा दी. जी ! हां बात हो रही है मेदिनीनगर शहर का, ब्रिटिशों का बसाया शहर 125 वर्षों से अधिक उम्र नगरपालिका से नगर पर्षद होते हुए नगर निगम बनने तक का सफर यह शहर तय कर चुका है. पहले जिला मुख्यालय था. एक मई 1992 को प्रमंडलीय मुख्यालय होने का दर्जा प्राप्त हो गया.
60 लाख खर्च करके बंटेगा पानी, फेज टू योजना अधूरी
मेदिनीनगर : दर्द थमने का नाम नहीं ले रहा है, मर्ज दिन ब दिन पुराना होता जा रहा है. मर्ज ऐसा मानो लाइलाज हो गया. दूर करने के लिए प्रयास तो खूब हुए पर नतीजा शून्य निकला. ठीक उसी तरह जैसे मर्ज बढ़ता ही गया, ज्यों-ज्यों दवा दी. जी ! हां बात हो रही है […]

शहर में आशियाना हो इस सपने को लेकर दूर दराज से लोग यहां पहुंचे. लेकिन अब यहां आकर गरमी के मौसम में गांव लौटना उनलोगों की मजबूरी हो गयी है. बात हो रही है पानी संकट की. शहर में पानी की समस्या काफी गहरा गया है. यह एक कोई एक दिन की समस्या नहीं है. बल्कि पिछले कई वर्षों से इस समस्या को मेदिनीनगर के लोग झेल रहे हैं.
पर इस समस्या से लोगों को निजात नहीं मिल रहा है. गरमी के मौसम शुरू होते ही जल स्तर नीचे चला जाता है. पिछले कई वर्षों से शहर में गरमी शुरू होते ही टैंकर से जलापूर्ति कराने की परंपरा सी बन गयी है. मानो यही मेदिनीनगर शहर की नियति है. इससे लोगों को निजात कैसे मिलेगा. इसे लेकर वादे खूब हुए. लेकिन हकीकत यही है कि पानी की समस्या दूर नहीं हुई. वैकल्पिक व्यवस्था के नाम पर टैंकर से जलापूर्ति आज भी मेदिनीनगर शहर की जरूरत बनी हुई है.