मालिपाड़ा में न सड़क, न पानी, ग्रामीण दूषित पानी पीने को विवश

लिट्टीपाड़ा. प्रखंड की कुंजबोन पंचायत स्थित मालिपाड़ा के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं.

कुंजबोना पंचायत में 70 परिवार के 450 लोग करते हैं निवास

14 मई

फोटो संख्या-05,06

कैप्शन- झरने का पानी लेते ग्रामीण, पगडंडी सड़क से गुजरते ग्रामीण

प्रतिनिधि, लिट्टीपाड़ा

प्रखंड की कुंजबोन पंचायत स्थित मालिपाड़ा के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. गांव के लोग झरने का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, जबकि गांव तक पहुंचने के लिए सड़क भी नहीं है. पेयजल और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. मालिपाड़ा के प्रधान टोला, मास्टर टोला और बीच टोला में कुल 74 परिवार के लगभग 450 लोग निवास करते हैं. ग्रामीणों ने बताया कि झारखंड राज्य गठन के 24 वर्ष बीत जाने के बाद भी गांव में न तो एक भी चापाकल लगाया गया और न ही मुख्य सड़क से गांव तक सड़क का निर्माण कराया गया. ग्रामीणों के अनुसार, आज भी गांव के लोग लगभग ढाई किलोमीटर दूर पहाड़ी के नीचे बरसाती नाले में बने झरने से पानी लाकर अपनी प्यास बुझाते हैं. इसी झरने के पानी पर आसपास के आधा दर्जन गांवों के लोग भी निर्भर हैं. बारिश के दिनों में झरने का पानी गंदा हो जाता है, जिससे डायरिया, मलेरिया और ब्रेन मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. दूषित पानी पीने के कारण लोग अक्सर बीमार पड़ते हैं.

गांव तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं

प्रखंड मुख्यालय से करीब 17 किलोमीटर दूर चारों ओर पहाड़ों से घिरे मालिपाड़ा गांव तक पहुंचने के लिए आज भी सड़क नहीं है. ग्रामीण उबड़-खाबड़ और पथरीली पगडंडियों के सहारे आवागमन करने को मजबूर हैं. ग्रामीणों ने बताया कि गांव से मुख्य सड़क तक करीब पांच किलोमीटर सड़क का निर्माण हो जाने से क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण न केवल आवागमन बाधित है, बल्कि शुद्ध पेयजल जैसी सुविधाएं भी गांव तक नहीं पहुंच पा रही हैं.

घर पर ही गर्भवती महिलाएं प्रसव कराने को हैं विवश

वहीं गर्भवती महिलाओं को घर पर ही प्रसव कराने को मजबूर होना पड़ता है. बारिश के दिनों में छोटा मालिपाड़ा और कुंजबोन गांव के बीच खेतों में पानी भर जाने से पूरा रास्ता कीचड़मय हो जाता है. इससे गांव का संपर्क पूरी तरह कट जाता है और मालिपाड़ा टापू में तब्दील हो जाता है. ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव में सड़क और पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है.

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Published by: Sanu kumar dutta

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