पाकुड़ : अलग झारखंड राज्य बनने के 14 साल बाद भी शिक्षा विभाग शत-प्रतिशत विद्यालयों में आधारभूत संरचना विकसित नहीं कर पाया. एक ओर जहां शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत स्कूली बच्चों को बुनियादी एवं मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने के प्रावधान निहित किये गये है.
वहीं दूसरी ओर सरकारी उदासीनता की वजह से बच्चों को शौचालय व पेयजल की सुविधा नहीं मिल पाती है. वहीं विभागीय उदासीनता के कारण कई स्कूलों में एमडीएम भी सुचारु रूप से नहीं चलाया जा पा रहा है. आश्चर्य का विषय यह है कि झारखंड शिक्षा परियोजना द्वारा जिले के 136 विद्यालयों में चापानल अधिष्ठापन को लेकर पेयजल स्वच्छता विभाग को सूची भी भेजी गयी परंतु अब तक शत-प्रतिशत चापानलों का अधिष्ठापन नहीं हो पाया है.
जिले के लिट्टीपाड़ा प्रखंड के उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय दारीकुड़िया एवं चालभिटा , उत्क्रमित मध्य विद्यालय डांगाकुडिया, प्राथमिक विद्यालय बीचपहाड़, उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय डोगीपहाड़, अमड़ापाड़ा प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय तिलईपाड़ा पहाड़ के बच्चों को पहाड़ के ऊपर स्थित झरना कुआ का पानी पीने को विवश होना पड़ रहा है.
