विश्व आदिवासी दिवस हमारे गौरव, संस्कृति और संघर्ष का प्रतीक है : सुखैर भगत

विश्व आदिवासी दिवस हमारे गौरव, संस्कृति और संघर्ष का प्रतीक है : सुखैर भगत

लोहरदगा़ विश्व आदिवासी दिवस पर लोहरदगा जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा पुराना नगर भवन में सादगीपूर्ण तरीके से कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष सुखैर भगत ने की, जबकि मुख्य अतिथि प्रो लोहरा उरांव थे. अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. इस अवसर पर जिला के विभिन्न प्रखंडों से आये नृत्य मंडली ‘खोड़हा’ ने पारंपरिक नृत्य और गीत प्रस्तुत कर आदिवासी समाज को जागरूक करते हुए संरक्षण और संवर्धन पर जोर दिया. जिला अध्यक्ष सुखैर भगत ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस हमारे गौरव, संस्कृति और संघर्ष का प्रतीक है. आदिवासी समाज की पहचान जल, जंगल और जमीन से है, जिसकी रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है. उन्होंने स्व शिबू सोरेन के संघर्ष और योगदान को याद करते हुए कहा कि एकजुट होकर ही हम अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं. उन्होंने शिक्षा, युवाओं में जागरूकता, नारी सशक्तिकरण और रोजगार को प्राथमिकता देने की अपील की. साथ ही मातृभाषा और संस्कृति को बचाने व नशा-मुक्त समाज की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया. आदिवासी दिवस हमें अपने पूर्वजों के बलिदान और सांस्कृतिक धरोहर की याद दिलाता है : विधायक डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि आदिवासी दिवस हमें अपने पूर्वजों के बलिदान और सांस्कृतिक धरोहर की याद दिलाता है. आदिवासी समाज ने देश की आजादी और विकास में अहम भूमिका निभायी है. उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के महत्व पर जोर देते हुए एकजुट रहने का संदेश दिया. महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास में सक्रिय भागीदारी की जरूरत : जिला परिषद अध्यक्ष रीना कुमारी भगत ने कहा कि आदिवासी महिलाएं समाज की रीढ़ हैं और बेटियों की शिक्षा ही सशक्त समाज की कुंजी है. आधुनिकता के साथ अपनी परंपराओं को बचाये रखने की अपील करते हुए उन्होंने महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास में सक्रिय भागीदारी की जरूरत पर जोर दिया. आदिवासी संस्कृति विश्व की अनमोल धरोहर : रांची जिला अध्यक्ष राकेश किरण महतो ने कहा कि आदिवासी संस्कृति विश्व की अनमोल धरोहर है और इसे संरक्षित रखना हम सबकी जिम्मेदारी है. उन्होंने युवाओं को शिक्षा, तकनीक और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया. आदिवासी समाज का प्रकृति के साथ सामंजस्य अद्वितीय है : मुख्य अतिथि प्रो लोहरा उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज का प्रकृति के साथ सामंजस्य अद्वितीय है. शिक्षा ही विकास की कुंजी है और हमें अपनी मातृभाषा व लोककला को संरक्षित रखना चाहिए. एकजुटता से ही हम अपने अधिकार और संस्कृति को बचा सकते हैं. मौके पर उपस्थित लोगों ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की. कार्यक्रम में प्रदेश प्रतिनिधि नेसार अहमद, विनय उरांव, जिला उपाध्यक्ष मोहन दुबे, युवा जिला अध्यक्ष विशाल डूंगड़ूग, जिला सोशल मीडिया प्रभारी प्रकाश उरांव, प्रखंड अध्यक्ष जुगल भगत, सैफ आलम, संगीता उरांव, प्रखंड अध्यक्ष विनोद सिंह खेरवार, सत्यदेव भगत, यूनुस अंसारी, अनिल उरांव, मंडल अध्यक्ष सेराजुल अंसारी, रामदेव उरांव, हमीद अंसारी, महताब अंसारी, रबिंद्र सिंह खेरवार, नंदकिशोर शुक्ला, मुनीम अंसारी, रुस्तम अंसारी, सानियरों उरांव, परवेज आलम, अबुल कलाम अंसारी, मनौवर आलम समेत कई लोग मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By SHAILESH AMBASHTHA

SHAILESH AMBASHTHA is a contributor at Prabhat Khabar.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >