किस्को़ लोहरदगा जिले के किस्को प्रखंड मुख्यालय से मात्र छह किलोमीटर की दूरी पर स्थित खरकी पंचायत के कोचा, ऊपर कोचा, बरनाग, करम टोली और बांध जैसे गांव आज भी विकास की बाट जोह रहे हैं. पहाड़ों की तलहटी में बसे इन गांवों में मुंडा, नगेसिया, उरांव, लोहार और तुरी समुदाय के लोग निवास करते हैं, जो आजादी के दशकों बाद भी नारकीय जीवन जीने को विवश हैं. पुल के अभाव में टापू बन जाते हैं गांव : ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी समस्या आवागमन और पुल का न होना है. बरसात के दिनों में पहाड़ी नदियों का जलस्तर बढ़ने से इन गांवों का संपर्क प्रखंड मुख्यालय से पूरी तरह कट जाता है. ग्रामीण जगदेव लोहरा और सोमा नगेसिया ने बताया कि पुल नहीं होने के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और मरीजों को अस्पताल ले जाना जान जोखिम में डालने जैसा होता है. कई बार ग्रामीणों को सप्ताह भर तक गांव में ही कैद रहना पड़ता है, जिससे खाने-पीने का संकट भी उत्पन्न हो जाता है. दूषित पानी और जर्जर सड़कें : गांव में पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है. लोग नदी का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं, जो बॉक्साइट माइंस के कारण अक्सर लाल और प्रदूषित रहता है. सड़कों की स्थिति इतनी जर्जर है कि पैदल चलना भी दूभर है. बुनियादी सुविधाओं और रोजगार के अभाव में युवा तेजी से पलायन कर रहे हैं, जिससे गांवों में अब केवल बुजुर्ग और बच्चे ही नजर आते हैं. प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी : ग्रामीण सोहबइत मुंडा और मुक्ति लकड़ा ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि केवल वोट मांगने के समय ही गांव आते हैं. चुनाव जीतने के बाद न तो मुखिया और न ही कोई अधिकारी यहां की सुध लेने पहुंचता है. ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी योजनाओं के लाभ वितरण में भी उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अविलंब नदी पर पुल निर्माण, शुद्ध पेयजल और पक्की सड़क की मांग की है ताकि उन्हें इस नारकीय जीवन से मुक्ति मिल सके.
विकास से कोसों दूर पहाड़ों की तलहटी में बसे गांव, बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव
विकास से कोसों दूर पहाड़ों की तलहटी में बसे गांव, बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव
