कुड़ू़ अपनी मांगों को लेकर मनरेगा कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने से प्रखंड में विकास योजनाएं पूरी तरह बेपटरी हो गयी है. स्थिति यह है कि 14 पंचायतों में संचालित लगभग दो हजार योजनाओं के पहिये थम गये हैं. रोजगार नहीं मिलने से निबंधित 33 हजार मजदूर या तो कम मजदूरी पर निजी कार्यों में हाड़तोड़ मेहनत कर रहे हैं या फिर पलायन को मजबूर हैं. प्रखंड में योजनाओं के संचालन, जॉब कार्ड बनाने और हाजिरी के लिए नियुक्त बीपीओ निलेंद्र कुमार, लेखा सहायक सुमति कुमारी, कंप्यूटर ऑपरेटर मुकेश यादव समेत सभी 14 रोजगार सेवक 12 मार्च से ही हड़ताल पर हैं. हालांकि, सहायक अभियंता विशाल मिंज और कनीय अभियंता अजय कच्छप व मो आसिफ हड़ताल में शामिल नहीं हैं, लेकिन मैदानी स्तर पर काम करने वाले कर्मियों की अनुपस्थिति से व्यवस्था चरमरा गयी है. भुगतान के डर से काम नहीं कर रहे मजदूर : मजदूरों को भय है कि रोजगार सेवक की अनुपस्थिति में उनका मास्टर रोल कौन भरेगा और मजदूरी का भुगतान कैसे होगा. इसी अनिश्चितता के कारण वे सरकारी काम से कतरा रहे हैं. क्या कहते हैं अधिकारी : सीओ संतोष उरांव ने बताया कि हड़ताल से उत्पन्न हालात से निपटने के लिए पंचायत सचिवों को निर्देशित किया गया है. पंचायत सचिवों के माध्यम से मजदूरों को काम दिलाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि पलायन रोका जा सके.
मनरेगा कर्मियों की हड़ताल से विकास ठप, मजदूरों का पलायन शुरू
मनरेगा कर्मियों की हड़ताल से विकास ठप, मजदूरों का पलायन शुरू
