कुड़ू. पारंपरिक स्वशासन पड़हा व्यवस्था का दो दिवसीय अधिवेशन गुरुवार को चीरी पतरा में सम्पन्न हुआ. इसमें पेसा कानून, पड़हा सशक्तीकरण तथा आदिवासी समाज को शिक्षित और जागरूक बनाने पर विशेष चर्चा की गयी. अधिवेशन में विभिन्न जिलों से आये पड़हा संयोजक, दीवान, उप-दीवान, महतो, पुजार, पहान और बुद्धिजीवी शामिल हुए. लगभग 200 गांवों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. गहन विचार-विमर्श के बाद पड़हा व्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए सर्वसम्मति से नियमावली पारित की गयी. इसमें विभिन्न स्तरों पर पंचों की संरचना तय की गई—गांव स्तर पर पद्दा पंच, पंचायत स्तर पर महतो पंच, प्रखंड स्तर पर बेल पंच, जिला स्तर पर पड़हा पंच और राज्य स्तर पर प्रांगणा पंच. अधिवेशन ने स्पष्ट किया कि पारंपरिक पड़हा व्यवस्था को संस्थागत रूप देकर आदिवासी समाज की एकता और अधिकारों को मजबूत किया जायेगा.
पारंपरिक स्वशासन पड़हा व्यवस्था का अधिवेशन संपन्न
पारंपरिक स्वशासन पड़हा व्यवस्था का अधिवेशन संपन्न
