मौसम आधारित प्रबंधन और उत्पादन बढ़ाने को लेकर वैज्ञानिक एडवाइजरी जारी

फसलों में समय अनुरुप उचित प्रबंधन जरूरी: डॉ. किरण सिंह

फसलों में समय अनुरुप उचित प्रबंधन जरूरी: डॉ. किरण सिंह किस्को लोहरदगा. डॉ. किरण सिंह, प्रधान कृषि वैज्ञानिक, ने किसानों के लिए महत्वपूर्ण कृषि एडवाइजरी जारी की है. उन्होंने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण फसलों में रोगों का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए समय पर प्रबंधन आवश्यक है. भिंडी की फसल में तना रोग से बचाव हेतु जैविक और रासायनिक दोनों उपाय अपनाये जा सकते हैं. जैविक नियंत्रण में ट्राइकोडर्मा और स्यूडोमोनास का 5 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर जड़ों के पास छिड़काव करें. रासायनिक नियंत्रण के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 3 ग्राम प्रति लीटर पानी प्रयोग करें. टमाटर की फसल में बारिश के बाद बैक्टीरियल विल्ट तेजी से फैल सकता है. इसके नियंत्रण के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (3 ग्राम) और प्लांटोमाइसिन (1 ग्राम) को प्रति लीटर पानी में मिलाकर पौधों की जड़ों में डालना प्रभावी होगा. केला उत्पादकों को सलाह दी गई है कि जीए3 (गिबरेलिक एसिड) का प्रयोग कर उत्पादन बढ़ाया जा सकता है. 1 मिली जीए3 को 20 लीटर पानी में मिलाकर 35–55 दिन पुराने गुच्छों पर 10 दिन के अंतराल पर तीन बार छिड़काव करने से फलों का आकार और वजन बढ़ता है. ओल की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी का चयन करें ओल (जिमीकंद) की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी का चयन करें. गजेंद्र, विधान और कुसुम जैसी उन्नत किस्में अपनाएं तथा 60×60 सेंटीमीटर की दूरी पर रोपण करें. पानी की बचत और मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए प्लास्टिक शीट (मल्चिंग) का उपयोग करें. इससे मिट्टी की नमी लंबे समय तक संरक्षित रहती है और फसल की वृद्धि बेहतर होती है. डॉ. सिंह ने किसानों से अपील की कि वे वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करें, ताकि रोगों से बचाव के साथ बेहतर उत्पादन और आय सुनिश्चित हो सके.

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By Akarsh aniket

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