लोहरदगा के अमित दुबई में फंसे, एयरस्ट्राइक के बीच दोस्तों संग मनाई होली

Lohardaga News: लोहरदगा के अमित कुमार दुबई में एयरस्ट्राइक तनाव के कारण फंस गए. अबू धाबी से कोलकाता लौटने की फ्लाइट रद्द होने के बाद उन्होंने दोस्तों संग वहीं होली मनाई. शारजाह से दिल्ली की फ्लाइट मिलने पर राहत मिली. परिवार से दूर रहकर भी सकारात्मक सोच और धैर्य बनाए रखा. पूरी खबर नीचे पढ़ें.

लोहरदगा से गोपी कृष्ण की रिपोर्ट

Lohardaga News: लोहरदगा निवासी अमित कुमार इन दिनों दुबई में फंसे हुए हैं. वह अपने दोस्तों के साथ 25 फरवरी को घूमने के लिए दुबई और अबू धाबी पहुंचे थे. 28 फरवरी को अबू धाबी से कोलकाता लौटने की उनकी फ्लाइट निर्धारित थी, लेकिन अचानक बदली अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों ने उनका पूरा कार्यक्रम बदल दिया. हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात में उत्पन्न एयरस्ट्राइक तनाव के कारण कई उड़ानें रद्द कर दी गईं और कुछ समय के लिए एयरबेस बंद कर दिया गया. इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ा और अमित की वापसी भी टल गई. उन्हें और उनके दोस्तों को दुबई में ही रुकना पड़ा.

परिवार से दूर, फिर भी मनाई होली

अचानक बदली परिस्थितियों के बीच होली का पर्व भी आ पहुंचा. परिवार और अपनों से दूर होने का दर्द अमित के चेहरे पर साफ झलक रहा था. घर पर परिजनों के साथ होली मनाने का आनंद अलग ही होता है, लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग थीं. इसके बावजूद अमित और उनके दोस्तों ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने दुबई में ही सादगी और उत्साह के साथ होली मनाने का निर्णय लिया. एक-दूसरे को रंग लगाकर, मिठाइयां बांटकर और शुभकामनाएं देकर उन्होंने त्योहार की खुशियां साझा कीं. विदेश की धरती पर मनाई गई यह होली उनके लिए यादगार बन गई.

विदेश में ऐसी स्थिति आसान नहीं: अमित

अमित ने बातचीत में बताया कि विदेश में इस तरह की स्थिति का सामना करना आसान नहीं होता. अचानक फ्लाइट रद्द होने और अनिश्चितता के माहौल ने सभी को चिंतित जरूर किया, लेकिन उन्होंने सकारात्मक सोच और धैर्य बनाए रखा. उन्होंने कहा कि इस बार परिवार की याद कुछ ज्यादा ही आई. होली जैसे पारंपरिक पर्व पर घर से दूर रहना भावुक कर देने वाला अनुभव रहा. फिर भी उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी और भरोसा रखा कि जल्द ही सब सामान्य होगा.

शारजाह से दिल्ली की फ्लाइट से मिली राहत

होलि के दिन ही एक राहत भरी खबर मिली. शारजाह से दिल्ली के लिए फ्लाइट उपलब्ध होने की सूचना मिलते ही अमित और उनके साथियों ने तुरंत टिकट बुक कर ली. निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 5 मार्च की रात 10 बजे शारजाह से उड़ान रवाना होगी और तड़के लगभग 3 बजे दिल्ली पहुंचने की संभावना है. इस सूचना के बाद सभी के चेहरों पर राहत दिखी. अब वे सुरक्षित स्वदेश वापसी की तैयारी में हैं और ईश्वर की कृपा के साथ दोनों देशों की सरकारों के सहयोग की उम्मीद लगाए हुए हैं.

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चुनौती ने सिखाया धैर्य और एकजुटता का पाठ

अमित और उनके साथियों के लिए यह अनुभव चुनौतीपूर्ण जरूर रहा, लेकिन इसने उन्हें धैर्य, एकजुटता और सकारात्मक सोच की अहमियत भी सिखाई. अचानक आई विपरीत परिस्थितियों के बीच उन्होंने संयम नहीं खोया और एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते रहे. अमित का कहना है कि घर पहुंचने के बाद वे परिवार के साथ विलंबित होली जरूर मनाएंगे. यह घटना उनके जीवन की एक ऐसी याद बन गई है, जो उन्हें हमेशा यह सिखाएगी कि मुश्किल समय में धैर्य और उम्मीद ही सबसे बड़ी ताकत होती है.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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