धधक रहे किस्को और पेशरार के जंगल, महुआ चुनने की चाह में राख हो रही वन संपदा

धधक रहे किस्को और पेशरार के जंगल, महुआ चुनने की चाह में राख हो रही वन संपदा

किस्को़ लोहरदगा जिले के किस्को और पेशरार प्रखंड के जंगलों में इन दिनों आग का तांडव जारी है. महुआ चुनने की सुगमता के लिए ग्रामीणों द्वारा सूखी पत्तियों में लगायी जा रही आग ने विकराल रूप ले लिया है. इससे न केवल बेशकीमती पेड़-पौधे जलकर नष्ट हो रहे हैं, बल्कि जंगली जानवर भी जान बचाने के लिए रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं. मार्च और अप्रैल के महीने में महुआ चुनने को लेकर ग्रामीणों द्वारा सफाई के नाम पर लगायी गयी आग पर्यावरण के लिए काल बन गयी है. विभाग के आग बुझाने के तमाम प्रयास अब तक नाकाफी साबित हुए हैं. नष्ट हो रही नर्सरी, लुप्त हो रहे हैं वन्यजीव : जंगलों में लगातार लग रही आग के कारण नये पौधों का उगना बंद हो गया है, जिससे वनों का घनत्व तेजी से घट रहा है. स्थानीय ग्रामीण मनोज महली, शिवानंद पांडेय और सोमरा उरांव ने बताया कि 10 वर्ष पूर्व ये जंगल काफी घने थे और गर्मी में भी यहां ठंडक रहती थी, लेकिन अब आग और माफियाओं की नजर के कारण बेशकीमती पेड़ गायब हो रहे हैं. आलम यह है कि दिन भर धुएं का गुबार छाया रहता है और शाम होते ही पहाड़ियां आग की लपटों से लाल नजर आती हैं. लू और उमस के बीच जंगल की आग ने स्थानीय तापमान में भारी बढ़ोतरी कर दी है. जागरूकता के अभाव में विफल हो रहा तंत्र : वन विभाग के कर्मी आग बुझाने का दावा तो करते हैं, लेकिन उनके लौटते ही जंगल फिर धधकने लगता है. वन साथी संदीप लोहरा के अनुसार, आग से वन संपदा को अपूरणीय क्षति हो रही है. विभाग का कहना है कि महुआ चुनने वाले लोग पकड़े नहीं जा रहे हैं, जिससे उन पर कार्रवाई करना मुश्किल हो रहा है. ग्रामीण खुद जिम्मेदारी नहीं समझेंगे तो आग पर नियंत्रण पाना कठिन : डीएफओ : इस संबंध में लोहरदगा डीएफओ अभिषेक कुमार ने कहा कि वनों में आग की सूचना मिलते ही टीम को भेजा जा रहा है. लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है, लेकिन जब तक ग्रामीण खुद जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, आग पर पूर्ण नियंत्रण पाना कठिन है. कहीं भी आग दिखे तो तुरंत विभाग को सूचित करें.

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Published by: Shailesh ambashtha

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