लो…धनतेरस आज, लोगों मे जबरदस्त उत्साह, जमकर होगी खरीदारी

धनतेरस का पर्व भारतीय संस्कृति में समृद्धि, शुभता और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक माना जाता है.

गोपी कुंवर लोहरदगा. धनतेरस का पर्व भारतीय संस्कृति में समृद्धि, शुभता और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक माना जाता है. इस वर्ष शनिवार को मनाये जानेवाले धनतेरस को लेकर लोहरदगा जिले में बाजारों में जबरदस्त चहल-पहल देखी जा रही है. शहर के मुख्य बाजारों, विशेषकर मेन रोड, में रंग-बिरंगी रोशनी से सजी दुकानों ने त्योहार का माहौल बना दिया है. प्रशासन ने सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर भी आवश्यक तैयारियां कर ली हैं. धनतेरस पर सोना-चांदी, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक सामान, मोटरसाइकिल और कारों की खरीदारी को लेकर लोगों में खासा उत्साह है. शुभ मुहूर्त में खरीदारी करने के लिए लोग एडवांस बुकिंग कर रहे हैं. खत्री ज्वेलरी हाउस के संजय खत्री और नीरज खत्री के अनुसार इस बार सोना-चांदी की खरीदारी में लोगों का रुझान अधिक है. वहीं हरिहर प्रसाद एंड संस के मनिष बर्मन और निखिल बर्मन ने बताया कि गहनों की मांग पिछले वर्षों की तुलना में ज्यादा है.

महिलाएं और युवतियां विशेष रूप से जेवर की दुकानों पर खरीदारी में जुटी हैं. बर्तन, दीये, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, चांदी के सिक्के जैसी पारंपरिक वस्तुओं की भी खूब मांग है. यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक सोच भी है हर वर्ष कुछ नया खरीदने से घर में लक्ष्मी का प्रवेश माना जाता है.

धनतेरस पर लोहरदगा जिले में अनुमानित बिक्री का आंकड़ा 22 से 25 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. इसमें सोना-चांदी के आभूषणों की बिक्री 6–7 करोड़, दोपहिया वाहन (इलेक्ट्रिक सहित) 4 करोड़, ट्रैक्टर 1 करोड़, इलेक्ट्रॉनिक रिक्शा और ऑटो रिक्शा 2 करोड़, फोर व्हीलर 1 करोड़, टीवी, फ्रिज, मोबाइल, वाशिंग मशीन, फर्नीचर आदि तीन करोड़, कांसा, पीतल, तांबा, स्टील और कांच के बर्तन 2 करोड़, मिट्टी के दीये 5 लाख, करंज और सरसों तेल 30 लाख तथा झाड़ू की बिक्री 20 लाख रुपये तक पहुंचने की संभावना है.

लोहरदगा चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के सदस्य संजय बर्मन ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी में की गई कटौती से मध्यम वर्ग और आम उपभोक्ताओं को राहत मिली है, जिससे बाजार में उत्साह का माहौल है. इसका असर धनतेरस की बिक्री पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है.

धनतेरस अब केवल एक धार्मिक पर्व नहीं रहा, बल्कि यह सभी समुदायों के लिए एक उत्सव बन गया है. दुकानदारों द्वारा दी जा रही छूट और सीमित समय के बंपर ऑफर के कारण अब दूसरे धर्म-संप्रदाय के लोग भी इस दिन खरीदारी करने आते हैं. यह पर्व भारतीय संस्कृति की विविधता, समृद्धि और सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण बन चुका है.

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Published by: Vikash nath

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