अविराम संस्थान ने किसानों के बीच नि:शुल्क मत्स्य जीरा का वितरण किया

अविराम संस्थान ने किसानों के बीच नि:शुल्क मत्स्य जीरा का वितरण किया

कुड़ू़ अविराम ग्रामीण विकास स्वयंसेवी संस्थान माराडीह, कुड़ू द्वारा वर्षों से मत्स्य पालन के क्षेत्र में वैज्ञानिक पद्धति से कार्य किया जा रहा है. संस्थान की अविराम हेचरी में हाइब्रिड तकनीक से मत्स्य जीरा का उत्पादन किया जाता है. बुधवार को किसानों के बीच नि:शुल्क मत्स्य जीरा का वितरण शिविर के माध्यम से किया गया. यह पहल किसानों की आर्थिक तंगी दूर करने और उन्हें आजीविका का साधन उपलब्ध कराने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है. संस्थान के सचिव इंद्रजीत कुमार भारती ने जरूरतमंद किसानों का चयन कर उन्हें एक-एक लाख मत्स्य जीरा नि:शुल्क प्रदान किया. लाभान्वित किसानों में कोलसिमरी के शिबू उरांव, लावगांई के मुकुल उरांव, माराडीह के रतन उरांव और उपवन उरांव, लोहरदगा सदर के बराटपुर के गोयो भगत, डोरोटोली के बिनोद उरांव, जिदो के धर्मेंद्र उरांव, लावगांई के सुरेंद्र उरांव समेत कई अन्य किसान शामिल हैं. संस्थान के विश्वजीत भारती, लक्ष्मण मुंडा और बिरेंद्र बाधवार ने चयनित किसानों के बीच मत्स्य जीरा का वितरण किया. मत्स्य पालन को लेकर किसानों को नि:शुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया गया. मछली चारा के रूप में एग्रीमीन विटामिन, सरसों की खली, धान की पोलिश और गीला गोबर का भी वितरण किया गया. एक लाख मत्स्य जीरा के लिए लगभग तीन एकड़ जल क्षेत्र की आवश्यकता होती है, जिसमें से लगभग पचास हजार मछली के बच्चे तैयार होते हैं. किसान एक माह में इनका विक्रय कर लगभग बीस हजार रुपये और छह माह में पचास हजार रुपये तक की आय प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही एक किसान अन्य पांच से दस किसानों को मत्स्य बीज उपलब्ध करा सकते हैं, जिससे यह आजीविका श्रृंखला लगातार विस्तारित होती जायेगी. सचिव इंद्रजीत कुमार भारती ने बताया कि अविराम संस्थान प्रतिवर्ष नि:शुल्क मत्स्य जीरा और प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर हजारों किसानों को स्वावलंबी बना रहा है. इससे ग्रामीण क्षेत्र के किसान आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं और मत्स्य पालन को व्यवसायिक रूप में अपना रहे हैं.

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By SHAILESH AMBASHTHA

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