बालू माफियाओं का कारनामा : कोयल नदी पुल क्षतिग्रस्त, ट्रेनों का परिचालन ठप
बालू माफियाओं का कारनामा : कोयल नदी पुल क्षतिग्रस्त, ट्रेनों का परिचालन ठप
लोहरदगा़ जिले में बेखौफ जारी बालू के अवैध खनन का अब तक का सबसे बड़ा और गंभीर खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है. कोयल नदी से निरंतर हो रहे अवैध बालू उठाव के कारण रेलवे पुल इस कदर क्षतिग्रस्त हो गया है कि दक्षिण पूर्व रेलवे को इस मार्ग पर ट्रेनों का परिचालन तत्काल प्रभाव से बंद करना पड़ा है. स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब लोहरदगा होकर चलने वाली राजधानी एक्सप्रेस सहित अन्य महत्वपूर्ण एक्सप्रेस ट्रेनों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है. बालू उत्खनन से संकट पैदा हुआ : दक्षिण पूर्व रेलवे के जीएम ने स्पष्ट किया है कि पुल के पिलरों के पास से अत्यधिक बालू उत्खनन के कारण नींव कमजोर हुई और यह संकट पैदा हुआ. लंबे समय से कोयल और शंख नदी से बड़े पैमाने पर हो रही बालू निकासी ने नदी के तल को काफी नीचे धकेल दिया है, जिससे पिलरों के आसपास कटाव खतरनाक स्तर तक बढ़ गया. स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात के अंधेरे में ट्रैक्टरों और हाइवा के माध्यम से पुल के ठीक नीचे से बालू की लूट मची रही, लेकिन जिला प्रशासन और टास्क फोर्स मूकदर्शक बने रहे. प्रशासन की खामोशी से माफियाओं के हौसले बुलंद : हैरानी की बात यह है कि एनजीटी के कड़े प्रतिबंध और राज्य मुख्यालय द्वारा भेजी गयी अवैध खननकर्ताओं की सूची के बावजूद लोहरदगा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. बैठकों और कागजी निर्देशों का दौर तो चलता रहा, लेकिन धरातल पर माफियाओं के हौसले बुलंद रहे. आज आलम यह है कि जहां करोड़ों की रेल संपत्ति और सुरक्षा खतरे में पड़ गयी, वहीं यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. प्रशासन की इस विफलता ने जिले के खनिज प्रबंधन पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है.
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