लोहरदगा : सांसद सुदर्शन भगत कहते हैं कि क्षेत्र का विकास मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता रही. लोकसभा में प्रश्नकाल के माध्यम से या संबंधित विभाग के मंत्रियों को पत्र लिख कर क्षेत्र की समस्याओं को बताया. प्राथमिकता के आधार पर हमने इंजीनियरिंग, मेडिकल या फिर तकनीकी शिक्षा हेतु कोशिश की, ये अलग बात है कि इसमें सफलता नहीं मिली.
सांसद कहते हैं कि सरकार और प्रशासन का काम योजनाओं को धरातल पर उतारने का है. केंद्र की यूपीए सरकार ने इस क्षेत्र के विकास पर कभी ध्यान नहीं दिया, हम विपक्ष में थे.
हमारी बातों एवं भावनाओं को नजरअंदाज किया गया. श्री भगत कहते हैं कि जनता की कसौटी पर मैं खरा उतरा हूं. मैंने जनता के हित में काम किया. जो भी अधूरे काम बचे हैं, दोबारा संसद में जाकर उसे पूरा करूंगा. श्री भगत अपने सांसद काल की सबसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहते हैं कि गुमला में बाइपास सड़क की स्वीकृति दिलायी.
वह कहते हैं कि कुछ मलाल भी रह गया है. मैं ही नहीं, मुझसे पहले भी जिन लोगों का नेतृत्व इस लोकसभा क्षेत्र में रहा है, सभी की अपेक्षा रही है कि लोहरदगा कोरबा रेल लाइन से जुड़े, मेरी भी यही प्राथमिकता रही. हमने वर्ष के तीनों सत्रों में प्रयास भी किया, लेकिन हमें इस काम में सफलता नहीं मिली. मैंने संसद में कई मुद्दे रखे. सरना धर्म कोड पर मैंने सवाल उठाया. मैंने इस क्षेत्र में मेडिकल-इंजीनियरिंग तकनीकी कॉलेज, बॉक्साइट आधारित कारखाना खोलने का मुद्दा उठाया. लोहरदगा शहर से हिंडालको कंपनी के डंपिग यार्ड को हटाने का मुद्दा उठाया.
यह क्षेत्र गुलामों के उपनिवेश के रूप में विकसित होने लगा है. यह इस लोकसभा क्षेत्र की बड़ी समस्या है. यहां की बेटियां महानगरों में दूसरे के घरों में जूठे बरतन मांज रही हैं. वन आधारित उद्योग लगाने की भी मांग हमने की. सांसद ने कहा कि झारखंड को विशेष राज्य का दरजा जरूर मिलना चाहिए. हम विकास के दौड़ में लगातार पीछे होते जा रहे हैं.
सुदर्शन का दर्शन नहीं हुआ : रामेश्वर
– गोपी कृष्ण कुंवर –
लोहरदगा : लोहरदगा संसदीय चुनाव में सांसद सुदर्शन भगत के प्रतिद्वंद्वी रहे रामेश्वर उरांव कहते हैं कि क्षेत्र का विकास नहीं हुआ. पिछले पांच वर्षो से लोहरदगा विकास में पीछे छूट गया. जनता की उम्मीदों पर पानी फिर गया है. सुदर्शन भगत अच्छे आदमी हैं, लेकिन लोगों का कहना है कि उनका दर्शन नहीं होता है.
इससे साफ है कि जिस सांसद का दर्शन नहीं हो रहा है, वह विकास कहां से करेगा. सुदर्शन भगत जनता के साथ नहीं रहे. आम लोगों से दूरी बना ली.
वह जनता के दिल में जगह नहीं बना सके. समस्याओं के समाधान की दिशा में प्रयास नहीं किया. सांसद की कोई उपलब्धि नहीं रही. केंद्र की यूपीए सरकार की जो भी योजना रही, वह लोहरदगा तक पहुंच पायी. सांसद के स्तर पर कुछ विशेष नहीं मिल पाया. डॉ उरांव ने कहा कि लोहरदगा की जनता ने परिवर्तन का मन बना लिया है. जनता कांग्रेस के साथ है. लोगों ने इससे पहले मेरे प्रयास को देखा है. मैं जनता के सुख-दु:ख में साथ रहता हूं.
उनकी समस्याओं से सरोकार रखता हूं. झारखंड की समस्याओं और यहां के लोगों के दर्द को दिल्ली तक पहुंचाने का काम किया है. डॉ उरांव ने कहा कि लोहरदगा के लोग विकास का नजरिया रखते हैं. ऐसे लोगों को दिल्ली पहुंचायेंगे, जो उनकी आवाज बन सके. पूरे देश में यूपीए के कामकाज को लेकर अच्छा संदेश गया है. केंद्र की सरकार ने आम लोगों के हितों के लिए कई तरह के कानून बनाये हैं.
कांग्रेस समाज को बांटने, नहीं जोड़ने का काम करती है. देश की सेक्यूलर धारा को मजबूत करना हमारा लक्ष्य है. समाज में अंतिम व्यक्ति तक हिस्सेदारी पहुंचे, यही लक्ष्य होगा. आनेवाले दिनों में लोहरदगा को विकास की दौड़ में चूकने नहीं दिया जायेगा.
