लोहरदगा : लोकसभा चुनाव को लेकर लोहरदगा में राजनीतिक सरगरमी तेज हो गयी है. फिलहाल टिकट हथियाने में ही संभावित उम्मीदवार अपनी पूरी ताकत लगाये हुए हैं. शह और मात का खेल जारी है. इस क्षेत्र में रोचक मुकाबला होने की संभावना है.
यह लोकसभा क्षेत्र शुरू से ही अधिकारियों का पसंदीदा क्षेत्र रहा है. यहां नौकरी छोड़ कर चुनावी मैदान में उतरनेवाले लोगों की संख्या काफी ज्यादा रही है. इस बार कांग्रेस पार्टी से डॉ रामेश्वर उरांव, प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत और राज्य की शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव टिकट पाने के लिए प्रयासरत हैं. भाजपा में डॉ अरुण उरांव और सुदर्शन भगत के बीच जोर आजमाइश हो रही है.
सभी अपने स्तर पर पैरवी में जुटे हैं. वैसे तो मुख्य मुकाबला इस बार भाजपा एवं कांग्रेस में ही होने की संभावना है, लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे विशुनपुर के विधायक चमरा लिण्डा इस बार तृणमूल कांग्रेस के टिकट से फिर चुनाव मैदान में उतर कर समीकरण बदलने का प्रयास करेंगे. झारखंड विकास मोर्चा ने विरेन्द्र भगत को पहले ही उम्मीदवार घोषित कर दिया है. विरेन्द्र भगत व्यक्तिगत स्तर पर ही चुनाव की तैयारी में जुट गये हैं.
आजसू पार्टी किसी नये चेहरे को लोकसभा का चुनाव लड़ाना चाहती है. नगर पर्षद के अध्यक्ष रह चुके शिशिर टोप्पो आजसू पार्टी से टिकट लेने के लिए प्रयासरत हैं. लोहरदगा में स्थानीय मुद्दे के साथ-साथ विकास का भी मुद्दा उठेगा. जनता विकास चाहती है. साथ ही स्वच्छ छवि वाले उम्मीदवार भी अहमियत रखते हैं. चुनाव में दोनों राष्ट्रीय पार्टियों के उम्मीदवारों को अपने ही बागी उम्मीदवारों का सामना करना पड़ेगा.
दोनों दलों में असंतुष्टों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. जैसा कि देखा जा रहा है कि हाल के दिनों में क्षेत्रीय राजनीति काफी सक्रिय हुई है. इसका असर लोकसभा चुनाव में एवं मतदाताओं पर कितना पड़ेगा, ये तो चुनाव परिणाम ही बताएगा. फिलहाल चुनावी परिदृश्य स्पष्ट नहीं है.
