बड़े पैमाने पर पलायन कर रहे हैं किसान

भंडरा-लोहरदगा : भंडरा प्रखंड में महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत 10 महीने से कोई काम नहीं हो रहा है. इस वजह से लोगों को रोजगार नहीं मिला. फलस्वरूप क्षेत्र से बड़े पैमाने पर लोग रोजगार की तलाश में अन्य प्रदेशों में पलायन कर चुके हैं. कई परिवार के लोग मनरेगा योजना […]

भंडरा-लोहरदगा : भंडरा प्रखंड में महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत 10 महीने से कोई काम नहीं हो रहा है. इस वजह से लोगों को रोजगार नहीं मिला. फलस्वरूप क्षेत्र से बड़े पैमाने पर लोग रोजगार की तलाश में अन्य प्रदेशों में पलायन कर चुके हैं. कई परिवार के लोग मनरेगा योजना शुरू होने की आस में कुछ दिन गांव में रहे, लेकिन निराश होने के बाद रोजगार की तलाश में पलायन कर गये. प्रखंड के गडरपो पंचायत के सेमरा गांव की आबादी 493 है. 157 लोग रोजगार की तलाश में कहीं और जा चुके हैं.
महज 103 परिवार ही मनरेगा के तहत निबंधित हैं. उन्हें भी पर्याप्त काम नहीं मिलता. आर्थिक रूप से बहुत गरीब लोग काम की तलाश में हर साल कहीं और चले जाते हैं और बरसात शुरू होने से पहले खेती का काम करने के लिए लौट आते हैं.
गांव में बहुत कम बचे हैं युवा : इस गांव में युवाओं की संख्या नगण्य रह गयी है. लोग वृद्ध माता-पिता को छोड़ कर रोजी-रोटी के जुगाड़ में अन्य शहर या राज्य चले जाते हैं. कई ऐसे भी परिवार हैं, जो अपने घरों का धान ,चावल दूसरे घरों में रख कर घर में ताला बंद कर कहीं और कमाने चले जाते हैं.
राधेश्याम साहू का कहना है कि मनरेगा में एक परिवार को 100 दिन काम देने का प्रावधान है. परिवार का दो सदस्य 50 दिन काम करता है. उसके बाद उन्हें मनरेगा में काम नहीं मिलता. मजदूर बेरोजगार हो जाते हैं.
हसीब अंसारी कहते हैं कि मनरेगा में बैंक खाता के माध्यम से भुगतान होता है. बैंक की भीड़ एवं समय पर भुगतान का नहीं होना भी मजदूरों को मनरेगा से दूर कर देता है.
बीडीओ अजय भगत का कहना है कि बरसात के दिनों में मजदूरों के पास खेत में काम था. सेमरा सहित सभी गांव में मनरेगा योजना चलाने का निर्देश पंचायत सेवकों एवं मुखिया को दी गयी है.
गडरपो पंचायत की मुखिया निशा कुमारी कहती हैं कि पंचायत चुनाव के बाद बहुत सारी योजनाएं चयन कर स्वीकृति के लिए भेजी गयी हैं. अब गांव में काम की कमी होने नहीं दी जायेगी. मजदूरों को गांव में ही काम मिलेगा. सेमरा गांव के ज्यादातर युवक बाहर हैं. घरों में वृद्ध या बच्चे रह गये हैं. किसी-किसी घर में एक ही वयस्क है.

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