अभावग्रस्त व घोर नक्सल प्रभावित गांव की बेटी ने किया कमाल

इंटर आर्ट्स की परीक्षा में गुमला जिले में तीसरा स्थान हासिल किया है अंजनी कुमारी ने. पिता बांस के सूप, टोकरी बना कर बेचते हैं. इसकी आय से ही चलता है परिवार. रायडीह : रायडीह प्रखंड के जादी माड़ाकोना गांव घोर नक्सल प्रभावित है. गांव में न पानी, बिजली और न सड़क है. फिर भी […]

इंटर आर्ट्स की परीक्षा में गुमला जिले में तीसरा स्थान हासिल किया है अंजनी कुमारी ने. पिता बांस के सूप, टोकरी बना कर बेचते हैं. इसकी आय से ही चलता है परिवार.
रायडीह : रायडीह प्रखंड के जादी माड़ाकोना गांव घोर नक्सल प्रभावित है. गांव में न पानी, बिजली और न सड़क है. फिर भी इस गांव की बेटी अंजनी कुमारी ने इंटर आर्ट्स में कमाल किया है. गुमला जिला के टॉप टेन में वह तीसरे स्थान पर है. उसे 355 अंक प्राप्त हुआ है. रायडीह प्रखंड के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय स्कूल से परीक्षा लिखी थी. अंजनी की इस सफलता से प्रखंड के लोगों के अलावा परिवार के सदस्य खुश हैं.
गरीब परिवार से आने वाली अंजनी के बेहतर प्रदर्शन से सभी लोग प्रभावित हैं. अंजनी के पिता फौदा तुरी हैं और बांस की टोकरी व सूप बना कर बाजार में बेचते हैं. इसी से उसके परिवार का जीविका चल रहा है. अंजनी की इस सफलता की जानकारी प्रभात खबर के प्रतिनिधि ने गांव जाकर उसके परिजनों को दी.
साथ में कांसीर पंचायत के मुखिया रामदेव बड़ाइक थे. बेटी की सफलता की जानकारी मिलते ही फौदा तुरी कीआंखों में आंसू छलक आये. उस समय घर पर अंजनी नहीं थी. वह एक शादी समारोह में भाग लेने डुमरी गयी हुई है. फौदा तुरी ने कहा कि मेरी बेटी पढ़ने में तेज थी.
लेकिन इतना अच्छा रिजल्ट करेगी. यह विश्वास नहीं था. मेरी इच्छा है कि वह आगे जितना पढ़ेगी, उसे पढ़ायेंगे. ताकि वह प्रशासनिक सेवा में जा सके. फौदा ने कहा : बेटी को पढ़ाने के लिए काहे न दिन -रात मजदूरी करना पड़े. करेंगे.
सात भाई-बहन हैं अंजनी : अंजनी अपने घर में सबसे प्यारी बेटी है. सात भाई- बहन है. छोटी होने के कारण सभी उसे प्यार करते हैं. दो भाई व दो बहन की शादी हो चुकी है. मां रिझमुनी देवी है.
गांव उपेक्षित, पर बेटी ने पहचान दी : मुखिया : मुखिया रामदेव बड़ाइक ने कहा कि जादी माड़ाकोना गांव उपेक्षित है. यहां किसी प्रकार की सुविधा नहीं है. लेकिन गांव की बेटी ने इंटर आर्ट्स में बेहतर रिजल्ट कर इस गांव को अलग पहचान दी है. उन्होंने फौदा तुरी को बधाई दी है.
पगडंडी से होकर गांव जाते हैं : कांसीर से जादी माड़ाकोना की दूरी पांच किमी है. 100 परिवार है. आबादी लगभग 700 है. गांव तक जाने के लिए सड़क नहीं है. पगडंडी से होकर गांव जाते हैं. एक छोटी नदी है. जहां पुल नहीं है. बरसात में टापू बन जाता है. बिजली नहीं पहुंची है. पीने के पानी की सुविधा नहीं है. गांव में रोजगार का साधन नहीं है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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