लोहरदगा : जिला विधिक सेवा प्राधिकार एवं बलदेव साहू महाविद्यालय के तत्वावधान में रैगिंग पर कानूनी कार्यशाला का आयोजन किया गया. प्राधिकार के सचिव रंजीत कुमार ने रैगिंग को पारिभाषित करते हुए कहा कि रैगिंग से तात्पर्य किसी विद्यार्थी से ऐसा कोई कार्य करने या कृत्य का संपादन करने के लिए कहे जाने, शब्दों, इशारों या संकेत द्वारा किसी ऐसे कार्य कराने, प्रलोभन देने, विवश करने, दबाव डालने से है, जिससे किसी भी प्रकार से मानव गरिमा का ह्रास होता है.
उसका व्यक्तित्व दूषित होता है या जिससे वह उपहास, अभित्रस या परिरोध से पीड़ित होता है या उस पर आपराधिक बल का प्रयोग किया जाता है. रैगिंग एक मानवीय उत्पीड़न का कृत्य है. यह एक समाज में अभिशाप है. वैसे व्यक्ति जो रैगिंग में संलिप्त पाये जाते हैं. उन्हें संस्थान या कॉलेज से निष्कासित किया जा सकता है.
छात्रवृत्ति से वंचित किया जा सकता है. परीक्षा से वंचित, उसका दाखिला रूक सकता है. उस पर एफआईआर दर्ज कर आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकता है. तथा सजा और जुर्माना दोनों से दंडित किया जा सकता है. रैगिंग का किसी भी रूप अपराध है.
इस रैगिंग को समाप्त करने करने के लिए हरेक व्यक्ति को एक दूसरे के प्रति मानवीय गरीमा को ठेस नहीं पहुंचाना होगा. उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति रुपया खोता है तो वह कुछ भी नहीं खोता है. यदि व्यक्ति स्वास्थ्य खोता है तो कुछ खोता है पर यदि चरित्र खोता है तो सब कुछ खो जाता है.
कार्यशाला में अधिवक्ता तौसिफ मेराज, हेमंत सिन्हा ने भी उपस्थित विद्यार्थियों को रैगिंग से संबंधित कानूनी जानकारी दी. मौके पर अधिवक्ता दीपक कुमार, मिथिलेश कुमार, कॉलेज के प्राचार्य डॉ लोहरा उरांव, शिक्षक तथा बड़ी संख्या में छात्र–छात्राएं मौजूद थे.
