सड़क, पानी अौर नहीं है खेल का मैदान

लोहरदगा : देश की आजादी में जान की कुर्बानी देने वाले शहीद पांडे गणपत राय का भंवरो गांव मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जार-जार आंसू बहा रहा है. इस गांव को सरकार ने शहीद के गांव के रूप में सूचीबद्ध किया है. भंडरा प्रखंड के भंवरो गांव के लोग आज भी बुनियादी जरूरतों सड़क, पानी, […]

लोहरदगा : देश की आजादी में जान की कुर्बानी देने वाले शहीद पांडे गणपत राय का भंवरो गांव मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जार-जार आंसू बहा रहा है. इस गांव को सरकार ने शहीद के गांव के रूप में सूचीबद्ध किया है. भंडरा प्रखंड के भंवरो गांव के लोग आज भी बुनियादी जरूरतों सड़क, पानी, शिक्षा जैसी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं.

भंवरो गांव के लोग इसके लिए यहां के सांसद, विधायक एवं जनप्रतिनिधियों को दोषी मानते हैं. लोगों का कहना है कि पहले बिहार सरकार के समय भंवरो गांव को उपेक्षित रखा गया. गांव के लोगों को उम्मीद थी कि झारखंड राज्य के गठन के बाद शहीद के सम्मान में गांव का उत्तरोत्तर विकास होगा. पर निराशा ही हाथ लगी है. गांव में शहीद पांडे गणपत राय की जमीन पर उनका स्मारक स्थल बना कर मूर्ति लगायी गयी है.
स्मारक स्थल में स्थायी मंच बनाया गया है. स्मारक स्थल उचित देखभाल व रख-रखाव के अभाव में जर्जरवस्था में पहुंच गया है. हालांकि भंवरो गांव में शहीद की याद में हर वर्ष 17 जनवरी को जयंती समारोह सह जतरा का भव्य आयोजन किया जाता है.
जयंती पर बीत वर्षों में झारखंड विधानसभा अध्यक्ष से लेकर केंद्रीय एवं राज्यमंत्री तक भाग ले चुके हैं. समारोह में अतिथियों द्वारा शहीद के गांव के विकास की बड़ी-बड़ी घोषणाएं की गयी. लेकिन घोषणा धरातल पर नहीं उतर सका. वर्तमान में स्थिति ऐसी है की भंवरो गांव को प्रखंड मुख्यालय से जोड़नेवाली तीन किलोमीटर सड़क का निर्माण भी झारखंड सरकार नहीं करा सकी है.
जबकि झारखंड राज्य के प्रथम विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी जब जयंती समारोह में शामिल होने आये थे तो समारोह को संबोधित करते हुए कहा था कि इस गांव तक आने वाली सड़क में यात्रा करते समय सड़क कि स्थिति से डरते हुए मैं हनुमान चालीसा पढ़ रहा था. सड़क का लंबा जाल बिछाने का दावा करनेवाले झारखंड सरकार शहीद के गांव को आज तक चलने लायक सड़क भी नहीं दे सकी.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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