कुड़ू़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कुड़ू में मरीजों को बेहतर इलाज के लिए रांची या लोहरदगा रेफर किये जाने पर भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. सांसद, विधायक और राज्य सरकार से मिली चार एंबुलेंस मामूली खराबी और रखरखाव के अभाव में परिसर में कबाड़ बन रही हैं. बार-बार पत्राचार के बावजूद जिला प्रशासन या जनप्रतिनिधियों ने इनकी मरम्मत की सुध नहीं ली. एनएच-39 और एनएच-143ए के किनारे स्थित होने के कारण यहां रोजाना सड़क हादसे होते हैं. ऐसे में एंबुलेंस नहीं मिलने पर परिजनों को निजी वाहनों के लिए मोटी रकम चुकानी पड़ती है. एक माह पहले ही सड़क हादसे के बाद सात घायलों को एक ही एंबुलेंस में भेड़-बकरी की तरह ठूंस कर रांची भेजना पड़ा था. चार कबाड़, तीन चालू : पूर्व विधायक कमल किशोर भगत और वर्तमान विधायक डॉ रामेश्वर उरांव द्वारा दी गयी एंबुलेंस कबाड़ हो चुकी हैं. राज्य सरकार से मिली दो अन्य गाड़ियां भी टायर फटने व इंजन में खराबी के कारण खड़ी हैं. फिलहाल अस्पताल में दो 108 एंबुलेंस और एक क्रिटिकल केयर वाहन ही कार्यरत है. 108 एंबुलेंस अमूमन गर्भवती महिलाओं को सदर अस्पताल पहुंचाने में व्यस्त रहती है, जिससे सड़क हादसों के समय अफरातफरी मच जाती है. दो माह पूर्व निवर्तमान उपायुक्त डॉ कुमार ताराचंद ने निरीक्षण के दौरान मरम्मत का भरोसा दिया था, लेकिन उनके तबादले के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया. बोलीं सीएचसी प्रभारी दर्जनों बार किया पत्राचार : सीएचसी प्रभारी डॉ सुलामी होरो ने बताया कि खराब पड़े एंबुलेंस को लेकर मासिक बैठकों में दर्जनों बार सूचना दी गयी और दो दर्जन से अधिक बार जिला प्रशासन को पत्राचार किया गया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला.
कुड़ू सीएचसी में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था, कबाड़ में सड़ रही चार एंबुलेंस
कुड़ू सीएचसी में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था, कबाड़ में सड़ रही चार एंबुलेंस
