जन अदालत बंद, अब बच्चे कर रहे पढ़ाई

लातेहार, सुनील झा : लातेहार के गारू प्रखंड स्थित राजकीयकृत मध्य विद्यालय सरयू कभी नक्सलियों अड्डा हुआ करता था. नक्सली खुलेआम विद्यालय कैंपस में जन अदालत लगाते थे. 2010 में विद्यालय संचालन के दौरान ही सुरक्षा बलों की नक्सलियों के साथ मुठभेड़ हो गयी थी. 2008 में विद्यालय में लैंड माइंस लगा दिया गया था. […]

लातेहार, सुनील झा : लातेहार के गारू प्रखंड स्थित राजकीयकृत मध्य विद्यालय सरयू कभी नक्सलियों अड्डा हुआ करता था. नक्सली खुलेआम विद्यालय कैंपस में जन अदालत लगाते थे. 2010 में विद्यालय संचालन के दौरान ही सुरक्षा बलों की नक्सलियों के साथ मुठभेड़ हो गयी थी. 2008 में विद्यालय में लैंड माइंस लगा दिया गया था.

जो विद्यालय कुछ वर्ष पूर्व के नक्सलियों के केंद्र के रूप में जाना जाता था, उस विद्यालय के बच्चे आज पठन-पाठन के साथ-साथ विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों में भी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं. विद्यालय के चार बच्चे जिला स्तर के चित्रांकन प्रतियोगिता में अव्वल रहे थे.
बदलते समय के साथ स्थिति भी तेजी से बदली. राजकीयकृत मध्य विद्यालय पहले हाइस्कूल में और अब प्लस टू विद्यालय में उत्क्रमित हो चुका है. अब बच्चों के बैठने के लिए कमरे कम पड़ रहे हैं. बच्चों की संख्या 650 तक पहुंच गयी है. इस वर्ष प्लस टू स्तर पर पहला बैच परीक्षा में शामिल हुआ था. 17 में से 16 बच्चे परीक्षा में पास हुए. मैट्रिक की परीक्षा में भी विद्यालय का रिजल्ट बेहतर हो रहा है.
नक्सल प्रभावित बच्चों के लिए आवासीय विद्यालय : सरकार ने नक्सल प्रभावित सरयू क्षेत्र के बच्चों के लिए समर्थ विद्यालय के नाम से आवासीय विद्यालय खोला है. यहां नक्सली घटना में प्रभावित बच्चों के पढ़ने की व्यवस्था की गयी है. यहां कई ऐसे गांव के बच्चे पढ़ते हैं, जहां से कभी नक्सली बच्चों की मांग करते थे.
समर्थ विद्यालय उत्क्रमित प्लस टू उच्च विद्यालय सरयू के कैंपस में चल रहा है. 100 सीट वाले विद्यालय में फिलहाल 64 बच्चे नामांकित हैं. कक्षा एक से आठ तक की पढ़ाई होती है. अभी अंशकालीन शिक्षक की नियुक्ति की गयी है. इसका संचालन केंद्र व राज्य सरकार मिलकर करते हैं. इसमें 60 फीसदी राशि केंद्र व 40 फीसदी राशि राज्य सरकार देती है.
डॉक्टर-इंजीनियर बनने का सपना देख रहे बच्चे
समर्थ विद्यालय में पढ़ाई के साथ आवासीय व्यवस्था से बच्चे काफी खुश हैं. छात्र बबलू उरांव व अमोद उरांव ने कहा कि पढ़ाई में मन लगा रहा है. पूछे जाने पर बच्चों ने बताया कि वे डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक व पुलिस अफसर बनना चाहते हैं.
वहीं उत्क्रमित प्लस टू उच्च विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक चंद्रशेखर सिंह कहते हैं कि 2011 के बाद से स्थिति बदली है. 2016 में सड़क भी बन गयी. इस वर्ष शत-प्रतिशत सीट पर नामांकन करने का लक्ष्य रखा गया है.

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