सतगावां में होलिका दहन के बाद होती है कीचड़ होली

होली पर निकलता है झुमटा, एक साथ गाते-बजाते हैं लोग

होली पर निकलता है झुमटा, एक साथ गाते-बजाते हैं लोग सुधीर सिंह, सतगावां. समय के साथ हर पर्व त्योहार को मनाने का तौर-तरीका बदल रहा है, पर कुछ ग्रामीण इलाकों में आज भी पुरानी परंपराएं व रीति रिवाज के आधार पर लोग त्योहार का आनंद लेते हैं. कोडरमा जिले के सुदूरवर्ती सतगावां प्रखंड के कुछ इलाकों में रंगों का त्योहार होली मनाने की पुरानी परंपरा आज भी कायम है. प्रखंड में लोग होलिका दहन के दिन ढोलक झाल के साथ गाना बजाना करते हैं. विभिन्न पंचायतों में आज भी वही पुरानी लोकभाषा के गीत एवं भजन कीर्तन से होली का त्योहार मनाया जाता है. मरचोई, माधोपुर, टेहरो, शिवपुर, नावाडीह, समलडीह आदि जगहों में लोग पौराणिक होली खेलते हैं इन जगहों पर परंपरा के अनुसार होलिका दहन किया जाता है. साथ ही उसके अगले दिन गांव के चौक-चौराहाें पर कीर्तन होली मंडली द्वारा गीत संगीत का कार्यक्रम होता है. लोग कीचड़ की होली खेलते हैं. इसके बाद होलिका दहन के राख को उड़ाने की परंपरा है. राख उड़ाने के बाद लोग रंग अबीर की होली खेलते हैं. इससे पहले होलिका दहन के दिन लोग विभिन्न स्वादिष्ट व्यंजन जैसे पुआ , पकवान, पकौड़ियां व चना आदि खाते हैं और खिलाते हैं. इससे गांव में आपसी भाईचारा व प्रेम बना रहता है. बुढ़वा होली के दिन झुमटा निकाला जाता है, जिसमें गांव के सभी लोग शामिल होकर गाना-बजाना करते हैं. हालांकि, समय के साथ गाना-बजाना करने वाले लोगों की कमी हो रही है. लोग डीजे की धुन व फिल्मी गीतों की ओर रुख कर रहे हैं. मरचोई के पूर्व सरपंच हृदय नारायण सिंह, भोला सिंह, अर्जुन सिंह आदि बताते हैं कि हम सभी को अपनी परंपरा को जीवित रखने का प्रयास करना चाहिए. इन्होंने बताया कि होली सामाजिक एकता और सौहार्द्र का पर्व है. शराब और मांस इसकी गरिमा को न बिगाड़े और लोग आपस में एकजुट होकर रहें यह जरूरी है. इन्होंने बताया कि यह खुशी की बात है कि सतगावां में कुछ जगहों पर अब भी पौराणिक होली का रंग बचा है, पर यह कब तक रहेगा, जब युवा पीढ़ी ही भटकाव के राह पर है.

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By DEEPESH KUMAR

DEEPESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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