कोडरमा बाजार : आदिवासियों का सबसे महत्वपूर्ण पर्व सरहुल सोमवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ. मरियमपुर में आदिवासी संघ के अध्यक्ष पवन माइकल कुजूर की अध्यक्षता में सरहुल महोत्सव का उद्घाटन आंगतुक अतिथियों द्वारा किया गया. इसके पूर्व सभी अतिथियों का स्वागत आदिवासी परंपरा के अनुसार कर उन्हें पगड़ी पहना कर […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
कोडरमा बाजार : आदिवासियों का सबसे महत्वपूर्ण पर्व सरहुल सोमवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ. मरियमपुर में आदिवासी संघ के अध्यक्ष पवन माइकल कुजूर की अध्यक्षता में सरहुल महोत्सव का उद्घाटन आंगतुक अतिथियों द्वारा किया गया. इसके पूर्व सभी अतिथियों का स्वागत आदिवासी परंपरा के अनुसार कर उन्हें पगड़ी पहना कर सम्मानित किया गया.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला सहकारिता पदाधिकारी चंद्रजीत खलखो ने कहा कि सरहुल पर्व प्रकृति के उपासना के प्रतीक है. कहा कि हमें जल जंगल और प्रकृति को बचाने के लिए आगे आना होगा, तभी मानव जीवन संरक्षित हो पायेगा.
आदिवासी संघ के अध्यक्ष पवन माइकल कुजूर ने कहा कि दुनिया तेजी से तरक्की कर रही है. परंतु अफसोस कि बात है कि आज भी आदिवासी समाज मुख्यधारा से कटा हुआ है. श्री कुजूर ने कहा कि सरकार और जनप्रतिनिधियों को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है. आदिवासियों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि आप लोग अपने बच्चों को शिक्षित करें. गलत विसंगतियों को छोड़ कर, अपने अधिकार के प्रति जागरूक बने.
समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर हो. तभी हमारे समाज का सर्वांगीण विकास हो सकता है. लगभग दो घंटों तक चले सरहुल महोत्सव में अम्बातरी ,नलवा ,ढोढाकोला ,बीकारो ,अमनातरी ,बेंदी ,भीतिया आदि सुदूरवर्ती क्षेत्रों से आये आदिवासी समाज के युवक-युवतियों ने पारंपरिक परिधान धारण कर मांदर की थाप पर जम कर आकर्षक नृत्य किया. इसके पूर्व स्थानीय सुजानपुर (लख्खीबागी) स्थित सरना स्थल पर पाहन थुरा मुर्मू और तालो हेम्ब्रम के नेतृत्व में पूजा-अर्चना कर पवन माइकल कुजूर के नेतृत्व में भव्य शोभायात्रा निकाली गयी, जो कोडरमा बाजार होते हुए समारोह स्थल पर पहुंची.
कार्यक्रम के दौरान सफल प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया. मौके पर मेजर अनीश, मोहित कुजूर, जेइ संजय लकड़ा,डॉ विमल प्रसाद , जयनगर सीओ, सतगांवा बीडीओ, अनिल हांसदा, रवि बाड़ा, बेंजामिन एक्का, भामा टुडू, देव निश एक्का, हरदुगन, प्रमोद किंडो, वनमाली मुंडा, रजत लकड़ा, पोलीकार्प तिर्की, जॉन सोरेंग, रुबेन लकड़ा, तुरन टोप्पो, दुर्गा हेसा, सोहराय उरांव, एएसआइ शहनवाज समेत भारी संख्या में लोग मौजूद थे.