झुमरीतिलैया : बेशक समय के बदलाव के साथ शहर में बड़ी बड़ी कंक्रीट की इमारतें खड़ी हो गयी. शहर को बसाने के लिए जंगल झाड़ उजाड़ दिये गये. आलम यह हुआ कि शहर की हवा प्रदूषित होने लगी. लेकिन इस भाग दौड़ की जिंदगी में कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो समाज के लिए मिसाल बन कर पर्यावरण संरक्षण के कार्य में लगे हैं. सबसे बड़ी बात है कि नि:स्वार्थ भाव से पर्यावरण संरक्षण से आस-पास का माहौल बदल गया है. हम बात कर रहे हैं शहर के वार्ड नंबर 26 स्थित प्रीतम महतो (पिता स्व सोहर महतो) की.
90 वर्षीय प्रीतम महतो की उम्र में कोई बुजुर्ग होने के कारण चलने लायक नहीं रहता, लेकिन इस उम्र में भी प्रीतम महतो ने मिसाल कायम की है. अपने आठ एकड़ जमीन में उन्होंने 50 हजार से ज्यादा पेड़ लगा रखे हैं. पेड़ लगाने का सिलसिला कभी रुकता नहीं है. बातचीत में श्री महतो बताते हैं कि देश की आजादी के समय उनकी उम्र 18 वर्ष थी. 1957 से लेकर अब तक लगातार दो घंटे मिट्टी काटते हैं और पेड़ लगाने की व्यवस्था करते हैं. वे अब तक 50 हजार से ज्यादा पेड़ लगा चुके हैं. उन्होंने बताया कि जो पेड़ बड़ा होकर गिर जाते हैं, उसे बेच देते हैं. प्रीतम की तीन बेटियो में से सभी का विवाह हो गया है, जबकि तीन बेटे घर पर ही खेती करते हैं. उनकी पत्नी का निधन 35 वर्ष पूर्व हो चुका है.
बगीचे में कई प्रकार के हैं पेड़
प्रीतम महतो की आठ एकड़ जमीन में बगीचा लगा है. बगीचे में सन बबूल, आम, अमरूद, जामुन, कटहल, शीशम, महुआ आदि के पेड़ लगे हुए हैं. प्रीतम बताते हैं कि सन बबूल वह पेड़ है, जिससे पेपर का निर्माण होता है, लेकिन यहां मशीन नहीं होने के कारण इस पेड़ का उपयोग नहीं हो पाता.
