मां की मौत के बाद अनाथ हो गये तीन भाई-बहन, पढ़ाई छूटी, रोटी पर संकट
तमाड़ प्रखंड के जारगो गांव में एक दर्दनाक घटना ने तीन मासूम बच्चों की जिंदगी को अंधेरे में धकेल दिया है.
शुभम हल्दार : तमाड़.
तमाड़ प्रखंड के जारगो गांव में एक दर्दनाक घटना ने तीन मासूम बच्चों की जिंदगी को अंधेरे में धकेल दिया है. मां-बाप के साये से वंचित हुए दो भाई और एक बहन अब अपने भविष्य को लेकर असहाय और अनिश्चितता के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं. इन मासूमों के सिर से माता-पिता का साया उठ जाने के बाद अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती दो वक्त की रोटी की जुगाड़ और शिक्षा को जारी रखने की है. जारगो निवासी रोईदास मुंडा की कई वर्ष पूर्व ही मौत हो चुकी थी. उसके बाद उनकी पत्नी बदन देवी ही अपने तीनों बच्चों का सहारा थीं. किसी तरह मेहनत-मजदूरी कर वह अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रही थीं और उनके बेहतर भविष्य का सपना देख रही थीं. लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. बताया जाता है कि चार फरवरी को बदन देवी अपने घर में चूल्हे पर खाना बना रही थीं. इसी दौरान अचानक आग की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से झुलस गयी. आसपास के ग्रामीणों ने तमाड़ अस्पताल पहुंचाया. जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें रिम्स, रांची रेफर किया गया. लेकिन जिंदगी की जंग लड़ते-लड़ते बदन देवी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. मां की मौत के साथ ही राहुल मुंडा (14), पटवारी कुमारी (12) और सुभाष मुंडा (7) पूरी तरह अनाथ हो गये. इन तीनों मासूमों के सामने अब जीवन यापन की गंभीर समस्या खड़ी हो गयी है. बच्चों के खाने-पीने की व्यवस्था फिलहाल पड़ोसियों और रिश्तेदारों की मदद से किसी तरह चल रही है. लेकिन यह व्यवस्था कब तक चलेगी. यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि मां की मौत के बाद इन बच्चों की पढ़ाई भी पूरी तरह से छूट गयी है. स्कूल जाने की उम्र में ये बच्चे अब अपनी जिंदगी की बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं. गांव के लोगों का कहना है कि बच्चों का भविष्य अब पूरी तरह सरकारी सहायता और समाज की संवेदनशीलता पर निर्भर है. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इन अनाथ बच्चों को तत्काल सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाये, ताकि उनके रहने, खाने और पढ़ाई की समुचित व्यवस्था हो सके. साथ ही बच्चों को अनाथ पेंशन, शिक्षा सहायता और आवास जैसी सुविधाएं उपलब्ध करायी जाये. जिससे उनका भविष्य सुरक्षित हो सके.
चार फरवरी को खाना पकाते वक्त जल गयी थी बदन देवी
पड़ोसियों और रिश्तेदारों की मदद से किसी तरह चल रही हैB