मनोरमा टूटी की प्रेरक कहानी: बंजर जमीन से समृद्धि तक का सफर

Khunti News: खूंटी के मुरहू प्रखंड अंतर्गत कुंजला पंचायत के ईठे गांव की मनोरमा टूटी की कहानी संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक यात्रा है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

खूंटी से चंदन कुमार की रिपोर्ट

Khunti News: मनोरमा टूटी की कहानी केवल एक महिला की सफलता की कथा नहीं, बल्कि पूरे गाँव की बदलती तस्वीर का जीवंत दस्तावेज है। मुरहू प्रखंड के कुंजला पंचायत अंतर्गत गांव ईठे की रहने वाली मनोरमा कभी अभावों से घिरी एक साधारण ग्रामीण महिला थीं. पति स्वर्गीय आनंद पाहन के निधन के बाद उनके जीवन में कठिनाइयों का अंधकार और गहरा गया था. बीपीएल परिवार से होने के कारण घर चलाना भी चुनौती था, बच्चों की पढ़ाई तो मानो एक अधूरा सपना बन चुकी थी. 

मनरेगा से मिली नई पहचान 

इसी बीच गांव की ग्रामसभा में उन्हें मनरेगा महिला मेट के रूप में चुना गया. यह चयन उनके जीवन का निर्णायक मोड़ सिद्ध हुआ. लीड्स संस्था और प्रखंड प्रशासन द्वारा उन्हें नियमित प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और क्षमता वर्धन का अवसर मिला। धीरे-धीरे मनोरमा ने आत्मविश्वास की नई उड़ान भरनी शुरू की. एक दिन उन्होंने अपने वर्षों से खाली पड़े बंजर खेत को देखकर मन ही मन संकल्प लिया “यदि धरती सूनी है, तो उसे हरियाली से भरना मेरा धर्म है.” उन्होंने परिवार और ग्रामीणों से चर्चा की और सामूहिक आम बागवानी का विचार रखा. उनकी प्रेरणा से पांच किसानों ने मिलकर 7 एकड़ भूमि में मनरेगा योजना के अंतर्गत आम बागवानी शुरू की. 

बढ़ती आमदनी और नए अवसर 

मनोरमा ने दिन-रात मेहनत की. उनके श्रम, धैर्य और दूरदृष्टि ने उस बंजर भूमि को फलते-फूलते बाग में बदल दिया. वर्ष 2017 में इसी बागवानी को “बिरसा मुंडा आम बागवानी” के नाम से पहचान मिली, जिसका नामकरण ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा द्वारा किया गया. आज वही बाग 7 एकड़ में लहलहा रहा है. आम और मौसमी सब्जियों की खेती से हर साल लगभग 3 लाख से 3.5  लाख रुपये तक की आय होती है. इतना ही नहीं, उसी भूमि पर मनरेगा से डोभा और भूमि संरक्षण विभाग द्वारा निर्मित तालाब में वे मछली पालन भी करती हैं, जिससे लगभग एक लाख रुपये अतिरिक्त आय प्राप्त होती है. 

पूरे गांव में फैला प्रभाव

मनोरमा की सफलता केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रही. उनके मार्गदर्शन और प्रेरणा से गांव में 70 एकड़ में बिरसा मुंडा आम बागवानी विकसित हुई, 41 तालाबों में मछली पालन शुरू हुआ और 38 परिवारों ने बकरी पालन को आय का साधन बनाया. एक समय जो महिला जीवन की कठिनाइयों से जूझ रही थी, वही आज अपने गांव और पंचायत की प्रेरणादायी महिला नेतृत्वकर्ता बन चुकी है. मनोरमा टूटी ने सिद्ध कर दिया कि साहस, परिश्रम और सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो बंजर ज़मीन ही नहीं, जीवन भी हरा-भरा हो उठता है. 

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By Sweta Vaidya

श्वेता वैद्य प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में एक साल से अधिक का अनुभव है. पिछले करीब दो महीनों से वे झारखंड बीट पर सक्रिय रूप से काम कर रही हैं. इस दौरान वे राज्य से जुड़ी ताजा खबरों, लोगों से जुड़े मुद्दे और जरूरी जानकारियों पर आधारित स्टोरीज तैयार कर रही हैं. इससे पहले उन्होंने लाइफस्टाइल बीट के लिए भी कंटेंट लिखा. इस बीट में उन्होंने रेसिपी, फैशन, ब्यूटी टिप्स, होम डेकोर, किचन टिप्स, गार्डनिंग टिप्स और लेटेस्ट मेहंदी डिजाइन्स जैसे रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर रोचक और उपयोगी आर्टिकल लिखे. श्वेता की हर बार कोशिश यही रहती है कि बात आसान, साफ और सीधे तरीके से लोगों तक पहुंचे, जिससे कि हर कोई उसे बिना दिक्कत के समझ सके. कंटेंट राइटर के तौर पर उनका फोकस होता है कि कंटेंट सिंपल, रिलेटेबल और यूजर-फ्रेंडली हो.

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