खूंटी. मुरहू में उत्पन्न विवाद और तनाव को लेकर तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया ने शांति की अपील की है. उन्होंने कहा कि खूंटी, जो बिरसा मुंडा की पावन धरती रही है, हमेशा से आंदोलनों की भूमि रही है. यहां की सबसे बड़ी पहचान सामाजिक समरसता रही है. इस धरती पर हिंदू, मुस्लिम, सरना, ईसाई सहित सभी धर्मों के लोग आपसी भाईचारे के साथ रहते आये हैं और मिल-जुलकर हर पर्व-त्योहार मनाते रहे हैं. मुरहू की हालिया घटना ने मन को गहरा आघात पहुंचाया है. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि हम अपनी ऊर्जा आपस में संघर्ष करने में व्यर्थ कर रहे हैं, जबकि हमें अपनी असली लड़ाई जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए लड़नी है. इसके साथ ही अशिक्षा, बेरोजगारी और गरीबी जैसी चुनौतियों से मुकाबला करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए. पत्थरबाजी और आपसी टकराव न केवल हमारी शक्ति को कमजोर करते हैं, बल्कि समाज में वैमनस्य भी फैलाते हैं. खूंटी की मिट्टी हमें कभी यह नहीं सिखाती. यहां की परंपरा प्रेम, सहयोग और एकता की रही है. रामनवमी जैसे पर्व हमें भगवान श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करने का अवसर देते हैं. यह समय है रामराज्य की कल्पना को साकार करने का, जहां प्रेम, न्याय, खुशहाली और समृद्धि हो. इसी तरह कुरान कहता है कि सभी इंसान बराबर हैं. जाति, धर्म, समुदाय का फर्क सिर्फ पहचान के लिए है. असली श्रेष्ठता इंसानियत और अच्छे आचरण में है. मुरहू समेत संपूर्ण खूंटी की जनता से अपील है कि सामाजिक समरसता को हर हाल में बनाये रखें. हम सभी एक परिवार के सदस्य हैं. परिवार में मतभेद होते हैं, लेकिन जैसे वाहन चलाते समय चालक साइड मिरर देखता जरूर है, पर उसकी नजर आगे के रास्ते पर रहती है, वैसे ही हमें भी बीती बातों से सीख लेकर आगे बढ़ना होगा. हमारा लक्ष्य होना चाहिए एक समृद्ध, खुशहाल और आदर्श खूंटी का निर्माण. मैं इस समय असम में चुनाव प्रचार में हूं. लौटते ही मुरहू आऊंगा. मेरे साथ खूंटी विधायक रामसूर्या मुंडा भी रहेंगे. हम दोनों समुदायों के लोगों को साथ बैठा कर आपसी गिले-शिकवे दूर करायेंगे और फिर हम सब पूर्व की भांति मिलजुल कर रहेंगे. आइए, हम सब मिलकर खूंटी को और बेहतर बनायें.
सामाजिक समरसता रही है खूंटी की बड़ी पहचान
मुरहू में उत्पन्न विवाद और तनाव को लेकर तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया ने शांति की अपील की है.
