खूंटी. अक्षय तृतीया के अवसर पर सोमवार को झारखंड महिला उत्थान ने बाल विवाहों की रोकथाम के लिए सतर्कता दिवस मनाया. इस अवसर पर बाल विवाह निषेध अधिकारी सीएमपीओ और आशा यूनिट ने खूंटी जिले में बाल विवाह की रोकथाम का संकल्प लिया. झारखंड महिला उत्थान के निदेशक नीलम बेसरा ने कहा कि अक्षय तृतीया के शुभ दिन की आड़ में बाल विवाह कानूनी अपराध है. प्रशासन और नागरिक समाज संगठनों की सतर्कता से अब अक्षय तृतीया के दिन होने वाले बाल विवाहों की संख्या में कमी आयी है. हमें इसे पूरी तरह रोकने की जरूरत है. झारखंड महिला उत्थान की काउंसलर प्रीतिवंती मेरी मुंदरी ने कहा कि चंद वर्षों पहले तक लोगों को यह भी नहीं पता था की नाबालिग बच्चों की शादी प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत दंडनीय अपराध है. इसमें किसी भी रूप में शामिल होने या सेवाएं देने पर दो साल की सजा जुर्माना या दोनों हो सकता है. अब लोग जागरूक हुए हैं, लोग बाल विवाह की सूचना दे रहे हैं. प्रशासन तुरंत इसकी रोकथाम के लिए कार्रवाई कर रही है. खूंटी जिले को 2030 से पहले बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य है. जिसे हासिल कर लिया जायेगा. इस अवसर पर झारखंड महिला उत्थान संस्था के सीएसडब्ल्यू अंजना बेसरा, गुंजन, सरस्वती, महादेव ने सोनमेर मंदिर और अंगराबारी मंदिर में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया.
बाल विवाह रोकथाम को लेकर सतर्कता दिवस मनाया गया
अक्षय तृतीया के अवसर पर सोमवार को झारखंड महिला उत्थान ने बाल विवाहों की रोकथाम के लिए सतर्कता दिवस मनाया.
