स्वस्थ हो बच्चा, तो समाज खुशहाल

खूंटी : जिला में शुक्रवार से मातृ शिशु स्वास्थ्य व पोषण माह का शुभारंभ हुआ. इस अभियान के तहत 31 जुलाई तक जिला के विभिन्न प्रखंडों के नौ माह से लेकर पांच वर्ष के बच्चों को विटामिन ए की दवा सहित कुपोषित बच्चों की पहचान व उपचार एवं धातृ व गर्भवती महिला को आयरन की […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | July 1, 2016 12:00 AM

खूंटी : जिला में शुक्रवार से मातृ शिशु स्वास्थ्य व पोषण माह का शुभारंभ हुआ. इस अभियान के तहत 31 जुलाई तक जिला के विभिन्न प्रखंडों के नौ माह से लेकर पांच वर्ष के बच्चों को विटामिन ए की दवा सहित कुपोषित बच्चों की पहचान व उपचार एवं धातृ व गर्भवती महिला को आयरन की गोली दी जायेगी.

कुपोषित बच्चों की पहचान आंगनबाड़ी केंद्रों व गांवों में की जायेगी. पहचान होने पर जिला के सदर अस्पताल के एमटीसी सेंटर में भरती कर उपचार किया जायेगा. उदघाटन के मौके पर सदर अस्पताल में समारोह का आयोजन हुआ. उदघाटन डीसी चंद्रशेखर व राज्य के पूर्व मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती ने दीप जला कर किया. मौके पर डीसी ने कहा कि एएनएम के ऊपर बड़ा दायित्व है. एक भी बच्चा विटामिन की दवा से वंचित न रहे, इस पर सभी पूरी तन्मयता से काम करें. उन्होंने कहा कि कोई भी देश व समाज तब तक खुशहाल नहीं हो सकता जब तक कि हर बच्चा स्वस्थ न हो.

अभियान जनहित में काफी महत्वाकांक्षी है. ऐसे में एएनएम लक्ष्य को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ें. पूर्व मुख्य सचिव सजल चक्रवती ने कहा कि संतुलित आहार न मिलने से विशेषकर गांवों के बच्चे कुपोषित हो जाते हैं. इसमें जागरूकता भी एक बड़ा कारण है. विटामिन ए की दवा देकर सभी देश के भविष्य को स्वस्थ रखने में कोई कसर न छोड़ें. सिविल सर्जन डॉ बिनोद उरांव, जिला आरसीएच पदाधिकारी डॉ चंद्रशेखर जायसवाल ने कहा कि जिला में 55 हजार 489 बच्चों को विटामिन ए की खुराक देने का लक्ष्य रखा गया है.

लक्ष्य पूरा हो, इसके लिए एएनएम को कड़े निर्देश दिये गये हैं. नगर पंचायत अध्यक्ष रानी टूटी व उपाध्यक्ष मदन मोहन मिश्र ने जिला स्वास्थ समिति द्वारा शुरू किये गये इस अभियान की सराहना की. कार्यक्रम का संचालन डीपीएम कानन बाला तिर्की व धन्यवाद ज्ञापन जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ प्रभात कुमार ने किया. मौके पर डीएस डॉ रामरेखा प्रसाद, डॉ ए मिश्र, सुनीता दास, प्रीति चौधरी, संतोष कुमार, सुबोध कुमार आदि मौजूद थे.क्या है अभियान का उद्देश्य : शिशु मृत्यु दर में कमी लाना, रोग प्रतिरोध क्षमता बढ़ाना, बच्चों को रतौंधी व कुपोषण से बचाना.