मैक्लुस्कीगंज के लोगों को सीएम से खास उम्मीद

मैक्लुस्कीगंज/डकरा : राज्य बनने के 14 वर्ष बाद बहुमत की सरकार रघुवर दास के नेतृत्व में बनी है. ऐसे में राज्य के एक एंग्लो इंडियन गांव मैक्लुस्कीगंज के एंग्लो इंडियन के बीच इस बात की चर्चा है कि इस बार कौन एंग्लो इंडियन विधायक मनोनीत होगा. ज्ञात हो कि आजादी के बाद जब भारत में […]

मैक्लुस्कीगंज/डकरा : राज्य बनने के 14 वर्ष बाद बहुमत की सरकार रघुवर दास के नेतृत्व में बनी है. ऐसे में राज्य के एक एंग्लो इंडियन गांव मैक्लुस्कीगंज के एंग्लो इंडियन के बीच इस बात की चर्चा है कि इस बार कौन एंग्लो इंडियन विधायक मनोनीत होगा.
ज्ञात हो कि आजादी के बाद जब भारत में संघीय व्यवस्था लागू हुई थी, तब चुनाव से सांसद और विधायक एकीकृत बिहार में चुने जाने लगे. ऐसे में साइमन कमीशन के दिशा निर्देश पर एंग्लो इंडियन समुदाय के हितों की रक्षा करने के लिए एक व्यवस्था लागू की गयी, जिसके तहत सदन में एक विधायक एंग्लो इंडियन समुदाय से मनोनीत किया जाने लगा.
जिस समय राज्य का बंटवारा हुआ, उस समय तक जेपी गेलिस्टीन को मनोनीत किया जा चुका था, वे पटना के रहनेवाले थे.
उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र जेजी गेलिस्टीन को मनोनीत कर दिया गया, ये भी पटना में रहते हैं. हालांकि औपचारिकता निभाने के लिए वे मैक्लुस्कीगंज के वोटर बने हुए हैं और सिर्फ चुनाव में वोट देने आते हैं. मैक्लुस्कीगंज में रहने वाले एंग्लो इंडियन की शिकायत है कि आज तक उन्होंने उनके लिए कुछ नहीं किया. उनके विधायक बनने से मात्र एक गैर एंग्लो इंडियन व्यक्ति को लाभ हुआ.
एंग्लो इंडियंस को मुख्यमंत्री रघुवर दास से उम्मीद है कि वे इस बार झारखंड की मिट्टी से जुड़े किसी एंग्लो इंडियन को विधायक मनोनीत करेंगे. मैक्लुस्कीगंज में रहनेवाले कई लोगों ने बताया कि डेनीस मेरेडिथ, मैल्कम हैरिगंन, आयवन बैरेट, डेवी बैरेट, नेल्सन पॉल गौडेन जैसे कई नाम हैं, जिन्हें विधायक बना कर मैक्लुस्कीगंज का विकास कराया जा सकता है. मैक्लुस्कीगंज में रहनेवाली एक बुजुर्ग एंग्लो इंडियन महिला किटी टेक्सरा ने विधानसभा चुनाव में वोट का बहिष्कार किया था. उनका कहना था कि उनके घर तक जाने के लिए न सड़क है न ही इसके घर में बिजली-पानी की व्यवस्था है.

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