Jharkhand Paddy Transplantation : झारखंड के कृषि निदेशालय की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में खरीफ सीजन 2026-27 के लिए फसलों की बुआई और रोपाई की प्रक्रिया जारी है. पलामू और गढ़वा को छोड़कर शेष जिला सूखे की स्थिति से बाहर आ गये हैं. करीब-करीब सभी जिलों में तय लक्ष्य के 70% के आसपास धान लग गया है. अगले 15 दिनों तक राज्य में रोपा का काम होगा. जुलाई के महीने में राज्य में बारिश की स्थिति सामान्य से काफी कम रही है. 319.4 मिमी की सामान्य वर्षा के मुकाबले केवल 102.2 मिमी बारिश ही दर्ज की गयी. यह सामान्य का करीब 32 प्रतिशत है. अगस्त महीने की शुरुआत में भी बारिश का औसत कम ही बना हुआ है. बारिश की कमी के बाद भी किसानों ने धान की रोपाई में तत्परता दिखाई है. राज्य में धान की खेती के लिए निर्धारित 18.04 लाख हेक्टेयर के कुल लक्ष्य के मुकाबले अब तक 12.52 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कवरेज पूरा कर लिया गया है, जो कुल लक्ष्य का 69.44% है. इसमें से 2.14 लाख हेक्टेयर में धान की सीधी बुआई की गयी है, जबकि 10.38 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई का कार्य संपन्न हो चुका है.
लक्ष्य के 76% में मक्का और 75% में दलहन लगा
मक्के की बुआई ने अच्छी प्रगति की है. विभाग के तय लक्ष्य का 76.01% खेतों में मक्का लगा है. दालों का कवरेज लक्ष्य का 75.37% दर्जकिया गया है. तेलहन की बुआई अब तक 40% लक्ष्य तक ही पहुंच पायी है. मोटे अनाज का कवरेज लक्ष्य का 56.53% रहा है. प्रमंडलवार आंकड़ों के अनुसार संताल परगना प्रमंडल में धान की रोपाई तय लक्ष्य के सबसे अधिक करीब 77% हो गयी है.
जानिये प्रमंडलवार स्थिति
| प्रमंडल | धान रोपा लक्ष्य | लगा |
| द छोटानागपुर | 5.67 | 4.07 |
| पलामू | 1.37 | 0.41 |
| उ छोटानागपुर | 3.36 | 1.78 |
| संताल परगना | 3.64 | 2.75 |
कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा
गढ़वा और पलामू में अभी भी खेती की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. इस पर राज्य सरकार का विशेष ध्यान है. हम लोग वहां के लिए अल्पकालीन के साथ-साथ दीर्घकालीन योजना भी बना रहे हैं. सरकार किसानों को हर तरह की सुविधा देने के लिए तैयार है.
रांची के प्रभारी मौसम केंद्र के अभिषेक आनंद ने कहा
अभी भी अल नीनो का असर है. इस कारण जितनी बारिश होनी चाहिए थी, उतनी नहीं हो पा रही है. चीन के पास एक तूफान बना हुआ है. इस कारण भारत में नमी नहीं आ पा रही है. इसका असर देश में दिख रहा है. झारखंड में भी सामान्य से कम बारिश हुई है. इसके बाद भी अगस्त में अच्छी बारिश का अनुमान है. पलामू प्रमंडल में यह आंकड़ा सबसे कम करीब 26.81% ही है. झारखंड के सभी जिलों में देवघर (92.95%) और दुमका (83.73%) जैसे जिलों में धान का कवरेज काफी बेहतर है.
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जुलाई में पलामू में हुई मात्र 69.2 मिमी बारिश
जुलाई 2026 के दौरान पलामू जिले में 344.7 मिमी की सामान्य वर्षा के मुकाबले केवल 69.2 मिमी वर्षा हुई. यह सामान्य का मात्र 20.08 प्रतिशत है. अगस्त महीने की शुरुआत (एक से 12 अगस्त तक) में भी पलामू की स्थिति खराब रही. यहां राज्य की औसत वर्षा 81.4 मिमी रही है. वहीं पलामू में इस दौरान केवल 12.3 मिमी बारिश दर्ज की गई है. आंकड़ों के अनुसार, पलामू में धान की सीधी बुआई का क्षेत्र शून्य है. इसका मतलब है कि यहां खेती पूरी तरह से रोपाई पर निर्भर है, जिसके लिए पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है.
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