मिहिजाम : दिल्ली में 11 और 12 सितंबर को आयोजित एनएफआईआर की 244वीं राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में रेलकर्मियों की विभिन्न लंबित समस्याओं और मांगों पर व्यापक चर्चा हुई. बैठक में चित्तरंजन रेलवेमेंस कांग्रेस (सीआरएमसी) के महासचिव सह एनएफआईआर के जोनल सचिव इंदरजीत सिंह ने रेलवे के निजीकरण और अनावश्यक आउटसोर्सिंग के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन शुरू करने का आह्वान किया. उन्होंने लंबित मांगों के समाधान के लिए जंतर-मंतर पर धरना देने की बात कही.
निजीकरण और आउटसोर्सिंग पर रोक की मांग
बैठक में रेलवे के निजीकरण व अनावश्यक आउटसोर्सिंग पर रोक, सभी रिक्त पदों को शीघ्र भरने तथा स्वीकृत पदों को समाप्त करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गयी. पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को पूर्ण रूप से बहाल करने और एनपीएस/यूपीएस को इसका विकल्प स्वीकार नहीं करने पर भी जोर दिया गया.
वेतन आयोग और लंबित डीए भुगतान की मांग
आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशें शीघ्र लागू करने, 18 माह के लंबित महंगाई भत्ता व महंगाई राहत का बकाया भुगतान तथा उत्पादकता आधारित बोनस (पीएलबी) को न्यूनतम मजदूरी से जोड़ने की मांग रखी गयी. कैडर पुनर्गठन जल्द पूरा कर कर्मचारियों को निर्धारित पदोन्नति का लाभ देने की मांग भी उठी.
सीएलडब्ल्यू को मजबूत करने पर जोर
सीएलडब्ल्यू को कमजोर होने और अनावश्यक आउटसोर्सिंग से बचाने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने, बंद स्टील फाउंड्री व आधारभूत ढांचे का उपयोग करने तथा सीएलडब्ल्यू व डानकुनी कर्मचारियों को उचित प्रोत्साहन राशि और 30 प्रतिशत एचआरए देने की मांग की गयी.
चरणबद्ध आंदोलन को व्यापक बनाने की बात
इंदरजीत सिंह ने कहा कि रेलकर्मियों के अधिकार और उत्पादन इकाइयों की रक्षा के लिए आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से व्यापक बनाया जाएगा.
