कार्यक्रम. संप के 161वां स्थापना दिवस गांधी मैदान में धूमधाम से मनाया गया, लश्कर सोरेन ने कहा
आदिवासी समाज अपने धर्म को न भूलें: धर्मगुरू लश्कर सोरेन
कहा : नये लोग पुराने धर्म को भूल रहे, इसे सहेजें
जामताड़ा : गांधी मैदान में गुरुवार को ट्राइबल ड्रीम के तत्वावधान में 161 वां संथाल परगना स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया. स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रकार के संथाली कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया. मौके पर धर्मगुरु लश्कर सोरेन ने कहा कि संथाल परगना जिला का निर्माण भागलपुर एवं बीरभूम को काटकर संथाल परगना का निर्माण कया गया था. अंग्रेजो ने 10 नवंबर 1885 को मार्शल लॉ लागू किया था. साथ ही 22 दिसंबर को स्थापना दिवस के रुप में मनाया जा रहा है.
धर्मगुरु ने कहा कि सभी आदिवासी समाज आगे आये और समाज को साथ लेकर रहें. कहा आज के दिन में आदिवासी धर्म विलुप्त होते जा रहा है. नये लोग पुराने धर्म को भूल रहे हैं. सभी आदिवासी समाज से कहा कि अपना धर्म को बचाये रखें. तभी समाज का विकास हो पायेगा.
संताल परगना के 161वें स्थापना दिवस पर मंचासीन आदिवासी संगठनों के नेता, मांदर बजाते आदिवासी समाज के लोग व मौजूद महिलाएं. फोटो। प्रभात खबर
आदिवासी का तीर धनुष जब्त कर सरकार ने किया आदिवासी को अपमान : संजय
वहीं ट्राइबल ड्रीम के केंद्रीय अध्यक्ष संजय पाहन ने कहा कि तीर धनुष रखने को प्रावधान आदिवासी एक्ट में है. लेकिन रघुवर सरकार ने आदिवासी के तीर धुनष को जप्त कर आदिवासी को अपमान करने का काम किया है. कहा सीएसटी एसपीटी एक्ट को छेड़छाड़ कर सरकार ने आदिवासी के अहित में कार्य किया है. जिसका विरोध आदिवासी समाज के लोग कर रहा है,
लेकिन सरकार ने किसी को सुने बिना सीएसटी एसपीटी एक्ट में छेड़छाड़ किया गया जो गैर कानूनी है. आदिवासी की जमीन को हड़पने की साजिश सरकार कर रही है. जिसे आदिवासी किसी भी हाल में सफल होने नहीं देगा. कहा आज के दिन में आदिवासी समाज को एकजुट होना जरुरी है. इस दौरान डॉ विश्वनाथ टुडू ने कहा कि समाज को एक साथ होने के लिए शिक्षित होना अनिवार्य है. समाज को शिक्षा पर ज्यादा ध्यान देने की बात कही. समाज यदि शिक्षित होंगे तो देश आगे बढ़ेगा. देश आगे बढ़ने से हम सभी का विकास होगा.
तो आदिवासी हो जायेंगे बेघर : बालेश्वर
कार्यक्रम की अध्यक्षता बालेश्वर मुर्मू ने किया. जबकि संचालन सुनील किस्कू ने किया. उन्होंने एसपीटी सीएनटी एक्ट की के बारे में बताया. एसपीटी सीएनटी एक्ट में संशोधन से आदिवासी का नामोनिशान मिट जायेगा. आदिवासी बेघर हो जायेंगे. आदिवासियों का एक मात्र पूंजी जमीन है. इसे भी सरकार छिन रही है. यह हमलोग कभी भी नहीं देंगे. इसके लिए हमलाेंगों को जान ही क्यों न देनी पड़ी. हमारे पूर्व सिद्धो-कान्हू इसी सीएनटी एसपीटी एक्ट कानून के लिए अंग्रेजो से लड़ाई लड़ी थी. बीर सिद्धो कान्हू का बलिदान से अंगरेजों से सीएनटी एसपीटी एक्ट बनाया था. कार्यक्रम के दौरान आदिवासी परंगरागत गीत पर मांदर की थाप पर जमकर लोगों को थिरकते हुए देखा गया.
सभी आदिवासी ने अपने पारंपरिक हथियार तीर धुनष को भी साथ लाया था. वहीं आदिवासी महिलाओं द्वारा मुख्य अतिथि को अपने आदिवासी परंपरा से स्वागत किया. स्थापना दिवस के मौके पर एभेन गांवता संथाल परगना सरना धोरोम जुवान गांवता, जय आदिवासी युवा शक्ति, ट्राइबल ड्रीम सहित आदिवासी समाज के प्रतिनिधि ने भाग लिया. मौके पर हराधन मुर्मू, बाबुलाल सोरेन, मंडल सोरेन, रूपचांद मुर्मू, विशेश्वर मरांडी, सुरेन्द्र हेंब्रम, नलीन मुर्मू सहित अन्य मौजूद थे.
