जमशेदपुर : आदिवासी सोशियो कल्चरल एसोसिएशन (आसेका) की बैठक संगठन के अध्यक्ष सुभाष चंद्र मार्डी की अध्यक्षता में हुई. बैठक में 11 और 12 अक्टूबर को आयोजित होने वाली दो दिवसीय सामाजिक, सांस्कृतिक व शैक्षणिक कार्यशाला की तैयारियों पर चर्चा हुई. एसोसिएशन के अध्यक्ष सुभाष चंद्र मार्डी ने बताया - इस दो दिवसीय कार्यशाला में समाज के प्रबुद्ध बुद्धिजीवी, शिक्षाविद, छात्र-छात्राएं और आम नागरिक बड़ी संख्या में भाग लेंगे. इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज के लोगों को उनकी समृद्ध सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक धरोहर व विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं से गहराई से अवगत कराना है.
पंडित रघुनाथ मुर्मू के दर्शन, सरना धर्म पर होगी परिचर्चा
कार्यशाला के पहले दिन की शुरुआत ओलचिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू के दर्शन पर केंद्रित परिचर्चा से होगी, ताकि समाज के लोगों को उनके जीवन, संघर्ष, अभूतपूर्व कार्यों और उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी मिल सके. इस विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में ओडिशा के लक्ष्मण मरांडी और आसेका बिहार के पूर्व महासचिव सालखू मुर्मू अपने विचार साझा करेंगे. इसके पश्चात प्रथम दिन के दूसरे सत्र में सरना धर्म और पवित्र धार्मिक ग्रंथ 'हितल' के महत्व पर परिचर्चा आयोजित की जाएगी. इसमें नेपोल मुर्मू और प्रसिद्ध धर्मगुरू लाखाई टुडू बतौर वक्ता मार्गदर्शन करेंगे.
बंगाल व ओडिशा के प्रतिनिधि भी होंगे शामिल
कार्यशाला के दूसरे दिन ''संताल समाज, संस्कृति और मातृभाषा का महत्व'' विषय पर गहन परिचर्चा का आयोजन किया जाएगा. इस सत्र को प्रख्यात शिक्षाविद डॉ. जतिंद्र नाथ बेसरा और सालखू मुर्मू संबोधित करेंगे. आसेका झारखंड के महासचिव शंकर सोरेन ने बताया - इस भव्य कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में धाड़ दिशोम देश परगना बैजू मुर्मू शिरकत करेंगे. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस कार्यशाला का दायरा केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भी समाज के प्रतिनिधियों और प्रबुद्ध लोगों को आमंत्रित किया गया है, जिससे अंतरराज्यीय स्तर पर सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा मिल सके.
