मनपीटा में निर्माणाधीन हेवी व्हीकल ट्रेनिंग सेंटर का ग्रामीणों ने किया विरोध, काम रोकने की मांग

जमशेदपुर के मनपीटा गांव में हेवी व्हीकल ट्रेनिंग सेंटर के निर्माण पर ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ गया है. ग्रामसभा की सहमति के बिना काम शुरू करने पर पेसा कानून के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने तत्काल निर्माण रोकने की मांग की है.

जमशेदपुर : जमशेदपुर प्रखंड की हुरलुंग पंचायत अंतर्गत मनपीटा गांव में निर्माणाधीन हेवी व्हीकल ट्रेनिंग सेंटर को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश गहराता जा रहा है. रविवार को ग्रामीणों ने गांव में एक जुट होकर ग्रामसभा का आयोजन किया और परियोजना के निर्माण कार्य का जोरदार विरोध जताया. ग्रामीणों ने एक स्वर में जिला प्रशासन से तत्काल प्रभाव से निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग की. ग्रामीणों का कहना था कि ग्रामसभा की सहमति के बिना गांव में किसी भी सूरत में निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा.

पेसा कानून व पांचवीं अनुसूची के अनदेखी का आरोप

ग्रामसभा में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 24 अगस्त से बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के हेवी व्हीकल ट्रेनिंग सेंटर का निर्माण कार्य दोबारा शुरू कर दिया गया है. ग्रामीणों का कहना है कि मनपीटा क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहां पेसा कानून लागू है. नियम के अनुसार किसी भी सरकारी या गैर-सरकारी परियोजना की शुरुआत से पहले ग्रामसभा की लिखित सहमति अनिवार्य है. बिना सहमति काम शुरू करना ग्रामसभा के संवैधानिक अधिकारों की सीधी अनदेखी और उल्लंघन है.

पुराने आश्वासन के बाद भी काम शुरू होने से बढ़ा रोष, आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2023 में भी जब इस ट्रेनिंग सेंटर का निर्माण कार्य शुरू हुआ था, तब पुरजोर विरोध के बाद इसे स्थगित कर दिया गया था. उस समय तत्कालीन उपायुक्त ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया था कि उक्त स्थान पर यह निर्माण नहीं कराया जाएगा. इसके बावजूद दोबारा काम शुरू होने से ग्रामीणों में भारी रोष है. ग्रामसभा के माध्यम से ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और पेसा कानून के तहत ग्रामसभा के अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करने की मांग की है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने समय रहते निर्माण पर रोक नहीं लगाई, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे.


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लेखक के बारे में

By दशमत सोरेन

दशमत सोरेन ने रांची विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया है. वे 29 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उनकी विशेषज्ञता मुख्य रूप से झारखंड की आदिवासी-मूलवासी राजनीति, स्थानीय समुदायों की भाषा-संस्कृति और यहां के सामाजिक ताना-बाना है. वे वर्ष 2010 से प्रभात खबर के साथ एक ट्राइबल रिपोर्टर के रूप में काम कर रहे हैं.

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