Jamshedpur News : 2030 के बाद भी टाटा स्टील माइनिंग के क्षेत्र में मजबूत रहेगी : संदीप कुमार

टाटा स्टील वर्ष 2030 के बाद भी माइनिंग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर रहे, इस दिशा में कंपनी काम कर रही है. इसको लेकर नये माइंस को हासिल किया जायेगा और सारे ऑक्सन में टाटा स्टील भाग लेगी.

अन्य माइंस में भी एक शिफ्ट महिला के हवाले करने की तैयारी में कंपनी

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टाटा स्टील वर्ष 2030 के बाद भी माइनिंग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर रहे, इस दिशा में कंपनी काम कर रही है. इसको लेकर नये माइंस को हासिल किया जायेगा और सारे ऑक्सन में टाटा स्टील भाग लेगी. वहीं, 2030 तक कंपनी के पास माइंस की कोई दिक्कत नहीं है. आगे की रणनीति तैयार की जा रही है. यह जानकारी टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट रॉ मैटेरियल संदीप कुमार ने दी. श्री कुमार मंगलवार को पीएन बोस की याद में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने बताया कि वर्ष 2030 तक माइंस की उपलब्धता कंपनी के पास है. लेकिन भारत सरकार चाहती है कि लो ग्रेड आयरन ओर और कोयले का अपग्रेडेशन किया जाये और नये एरिया की तलाश की जाये. इसको लेकर भी कंपनी काम कर रही है. माइनिंग सेक्टर में भी एआइ और तकनीक का इस्तेमाल कर खनिज का शत प्रतिशत इस्तेमाल किया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि आइएसएम के साथ मिलकर सेंटर ऑफ इनोवेशन का संचालन किया जा रहा है, ताकि सारे खनिज पदार्थ का बेहतर इस्तेमाल किया जा सके और लो ग्रेड प्रोडक्ट का हाइ वैल्यू स्टील बनाया जा सके. उन्होंने बताया कि कंपनी चाहती है कि माइंस के सेक्टर में वर्ष 2030 तक और बेहतर व्यवस्था बनायी जाये. चूंकि, भारत सरकार ने नियम में तब्दीली की है और कहा है कि 2030 के बाद सारे माइंस को कंपनियों को ऑक्सन से ही हासिल करनी होगी, इस कारण सारे ऑक्शन में टाटा स्टील हिस्सा लेगी. उन्होंने बताया कि 2030 के बाद चुनौतियां है, लेकिन कंपनी के पास चार माइंस हैं. इन माइंसों का संचालन 2030 के बाद भी कंपनी के अधीन ही रहे. इस बीच नये माइंस के ऑक्शन में कंपनी भाग लेती रहेगी. स्टील के उत्पादन पर चर्चा करते हुए श्री संदीप ने बताया कि 1 टन स्टील बनाने में 1.6 टन आयरन ओर की जरूरत होती है. ऐसे में आने वाले समय में कंपनी के स्टील का प्रोडक्शन बढ़ेगा, तो रॉ मैटेरियल भी बढ़ेगा. इस कारण मिनरल स्ट्रैटेजी ग्रुप इस पर काम कर रही है. भारत में चार माइंस हैं. उसके अलावा कनाडा से भी शिपमेंट मंगाया गया है.

वीपी ने माना महिलाएं काम के प्रति ज्यादा वफादार

नोवामुंडी के आयरन ओर माइंस में एक शिफ्ट का संचालन ऑफिसर से लेकर कर्मचारी तक महिलाएं ही करती हैं. करीब दो साल पहले शुरू किये गये इस प्रयोग की सफलता के बाद जोड़ा, वेस्ट बोकारो समेत अन्य माइंस में भी यह प्रयोग करने की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है. इसकी जानकारी देते हुए वाइस प्रेसिडेंट संदीप कुमार ने बताया कि महिलाओं के काम करने से डायवर्सिटी आती है और डायवर्सिटी आने से नये-नये आइडिया आते हैं. महिलाओं में काम के प्रति ज्यादा ईमानदारी होती है. इस कारण कंपनी महिलाओं के अलावा ट्रांसजेंडर समेत अन्य समुदायों को लेकर और माइंस का संचालन करने के विजन पर काम कर रही है.

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By RAJESH SINGH

RAJESH SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

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