अब कोयले की जगह गैस से बनेगी स्टील, जानें इस बदलाव का आपकी लाइफ पर क्या होगा असर

टाटा स्टील मेरामंडली ने ब्लास्ट फर्नेस-1 में कोक ओवन गैस (COG) इंजेक्शन परियोजना शुरू की है, जो भारतीय इस्पात उद्योग में पहली बार है. यह पहल कंपनी के नेट जीरो 2045 के लक्ष्य को रेखांकित करती है.

जमशेदपुर: शहर में लगातार खराब हो रही हवा और बढ़ते प्रदूषण के बीच टाटा स्टील ने कम-कार्बन स्टील उत्पादन की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. टाटा स्टील मेरामंडली ने ब्लास्ट फर्नेस-1 में कोक ओवन गैस (COG) इंजेक्शन परियोजना शुरू की है. भारतीय इस्पात उद्योग में पहली बार इस तरह की पहल की गयी है. कंपनी का कहना है कि इससे बाहरी जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और पर्यावरणीय प्रभाव घटाने में मदद मिलेगी.

जमशेदपुर में प्रदूषण की स्थिति भी लगातार चिंता बढ़ा रही है. बीते दिनों के रिपोर्ट के अनुसार शहर का AQI 140 तक पहुंच गया था. AQI का मानक स्तर 50 माना जाता है. 101 से 200 के बीच AQI रहने पर फेफड़े और दिल के मरीजों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है. शहर में पीएम-10 का स्तर भी कई मौकों पर निर्धारित मानक से ऊपर दर्ज किया गया है.

ऐसे समय में टाटा स्टील का यह नया प्रयोग कम-कार्बन उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि, इस परियोजना का सीधा असर जमशेदपुर के AQI पर बताना जल्दबाजी होगी, लेकिन कंपनी के अनुसार इसका उद्देश्य जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल को कम करना और स्टील उत्पादन के पर्यावरणीय प्रभाव को घटाना है.

कम-कार्बन स्टील उत्पादन पर टाटा स्टील का फोकस

टाटा स्टील मेरामंडली वाइस प्रेसिडेंट ऑपरेशंस सुधीर कुमार मेहता ने कहा कि यह परियोजना इस बात का अच्छा उदाहरण है कि हमारी टीमें पर्यावरणीय प्रभाव को कम करते हुए दक्षता बढ़ाने के नये तरीकों की निरंतर तलाश करती हैं. ब्लास्ट फर्नेस प्रक्रिया में कोक ओवन गैस का प्रभावी उपयोग करके हम अपने परिचालन को अधिक कुशल और पर्यावरण के अनुकूल बना रहे हैं.

किसी एकीकृत स्टील प्लांट में COG, जो हाइड्रोजन और हाइड्रोकार्बन से भरपूर बाय-प्रोडक्ट गैस है, का आमतौर पर बिजली उत्पादन और हीटिंग के लिए उपयोग किया जाता है या इसे फ्लेयरिंग के जरिये जला दिया जाता है. टेक्नोलॉजी पार्टनर मेसर्स पॉल वुर्थ-एसएमएस और इक्विपमेंट सप्लायर मेसर्स कोबेल्को के सहयोग से टाटा स्टील ने ब्लास्ट फर्नेस में ट्यूयर्स के माध्यम से COG इंजेक्शन को सफलतापूर्वक लागू किया है.

इसमें जीवाश्म ईंधन के स्थान पर COG का रिड्यूसेंट के रूप में उपयोग किया जाता है, जिससे पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है. टाटा स्टील का लक्ष्य वर्ष 2045 तक नेट जीरो हासिल करना है और कंपनी कम-कार्बन तकनीकों के इस्तेमाल पर लगातार जोर दे रही है.

टाटा स्टील ब्लास्ट फर्नेस में कोल बेड मीथेन, हाइड्रोजन और बायोचार इंजेक्शन का भी सफलतापूर्वक प्रदर्शन कर चुकी है.

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By Brajesh kumar singh

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